नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Profit Tax) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगा दिया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स में कटौती की गई है। नई दरें 16 मई 2026 से लागू हो गई हैं।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स 33 रुपये से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर को शून्य रखा गया है।
पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार पेट्रोल पर लगा विशेष शुल्क
जानकारों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ईंधन आपूर्ति को लेकर दबाव बना हुआ है। ऐसे में सरकार ने देश में पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स लगाने का फैसला घरेलू बाजार में ईंधन की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने के लिए किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने भी दी राहत
इधर महाराष्ट्र सरकार ने विमान ईंधन (ATF) पर वैट में बड़ी राहत देते हुए टैक्स दर 18 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दी है। राज्य सरकार की यह नई व्यवस्था 15 मई 2026 से अगले 6 महीने यानी 14 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी।
महाराष्ट्र वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यदि सरकार आगे इस अवधि को नहीं बढ़ाती है, तो पुरानी टैक्स दर फिर से लागू हो जाएगी।
एयरलाइन कंपनियों को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि ATF पर टैक्स कम होने से एयरलाइन कंपनियों के परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिसका असर भविष्य में हवाई किरायों पर भी देखने को मिल सकता है। वहीं पेट्रोल निर्यात पर टैक्स बढ़ने से तेल कंपनियों की निर्यात रणनीति में बदलाव संभव माना जा रहा है।
