दिल्ली स्कूल फीस रेगुलेशन बिल पर छिड़ी सियासी जंग: AAP ने BJP पर लगाए निजी स्कूलों को बढ़ावा देने के आरो

दिल्ली विधानसभा में पेश किए गए नए स्कूल फीस रेगुलेशन बिल को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निजी स्कूलों के पक्ष में कानून बनाने का आरोप लगाया है। खासकर AAP नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने इस बिल को लेकर गहरी आपत्ति जताई और इसे “शिक्षा के निजीकरण को वैधता देने वाला क़ानून” करार दिया।

🔍 बिल में क्या है प्रावधान?

  1. फीस रेगुलेशन कमेटी की अध्यक्षता स्कूल मैनेजमेंट के हाथों में होगी।
  2. अभिभावकों की भूमिका बेहद सीमित रखी गई है – प्रतिनिधि केवल 5 होंगे, और उनका चुनाव नहीं, बल्कि लॉटरी (पर्ची) के ज़रिए तय होगा।
  3. अगर किसी अभिभावक को स्कूल की फीस वृद्धि से आपत्ति हो, तो उसे विरोध दर्ज कराने के लिए कम से कम 15% अभिभावकों को एकजुट करना होगा – यानी 3000 छात्रों वाले स्कूल में 450 पैरेंट्स की सहमति जरूरी होगी।
  4. ऑडिट या स्कूल अकाउंट्स की जांच का कोई जिक्र नहीं किया गया है।
  5. यदि फीस बढ़ा दी जाती है तो उस फैसले को कोर्ट में चुनौती देना मुमकिन नहीं होगा।

🗣️ आतिशी का हमला: भाजपा-स्कूल गठजोड़ उजागर

आतिशी ने आरोप लगाया कि यह बिल निजी स्कूलों को खुली छूट देने और उनके द्वारा मनमानी फीस बढ़ोतरी को वैध बनाने का जरिया है। उन्होंने एक वीडियो क्लिप साझा की जिसमें भाजपा विधायक राजकुमार भाटिया कथित रूप से कहते दिखते हैं कि बिल का मकसद है कि स्कूल स्वतंत्र रूप से फीस बढ़ा सकें।

उन्होंने कहा:

“इस बिल में अभिभावकों की बात सुनने की कोई पक्की व्यवस्था नहीं है। इससे सिर्फ स्कूलों को फायदा होगा।”

🔥 मनीष सिसोदिया का तीखा बयान: “भाजपा ने शिक्षा को काला धंधा बना दिया”

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि:

“अब स्कूलों के नाम पर मिडल क्लास की जेबें काटी जाएंगी और नेता व शिक्षा माफिया मालामाल होंगे।”

उन्होंने इसे भाजपा और प्राइवेट स्कूल लॉबी का गठबंधन बताते हुए कहा कि असली चेहरा अब सामने आ चुका है।

🏛️ सदन में समय बर्बाद करने का आरोप

आतिशी ने कहा कि भाजपा सदन का कीमती समय बर्बाद कर रही है।

उन्होंने कहा:

“दिल्ली में झुग्गी, अस्पतालों में दवाइयों की कमी, कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन भाजपा इन सबको दरकिनार कर रही है।”

✍️ AAP के सुझाव और संशोधन

आम आदमी पार्टी ने इस बिल में कई सुधारों और संशोधनों के सुझाव दिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इन सुझावों पर विधानसभा में चर्चा होगी और भाजपा अभिभावकों के हित में उनका समर्थन करेगी।

📌 निष्कर्ष: शिक्षा बनाम मुनाफा

दिल्ली में स्कूल फीस रेगुलेशन बिल को लेकर शुरू हुई बहस अब शिक्षा बनाम मुनाफाखोरी की जंग में तब्दील हो चुकी है।
जहां भाजपा इसे प्राइवेट स्कूलों की स्वतंत्रता के रूप में देख रही है, वहीं आप इसे एक ऐसा कदम बता रही है जो मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा और शिक्षा के अधिकार को पूंजीपतियों के हवाले कर देगा।

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