ना स्टीमेट, ना टेण्डर… ‘दबाव’ में करोड़ों का खेल! भारती भवन लाइन शिफ्टिंग मामला

ना स्टीमेट, ना टेण्डर… ‘दबाव’ में करोड़ों का खेल! भारती भवन लाइन शिफ्टिंग मामला

लखनऊ। रेजीडेंसी डिवीजन के यूपीआईएल उपकेंद्र अंतर्गत रानीगंज क्षेत्र में स्थित आरएसएस के कार्यालय भारती भवन के नाम पर बिजली विभाग में नियम-कानून ताक पर रखे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रभाव और दबाव के आगे पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया—और सरकारी खजाने को चूना लगाने की पटकथा लिख दी गई।

सूत्रों के मुताबिक भारती भवन के पास लगा 400 केवीए ट्रांसफार्मर और आसपास की ओवरहेड लाइनों को हटवाकर अंडरग्राउंड कराने के लिए सीधे चेयरमैन व एमडी तक दबाव बनाया गया। दबाव के बीच यह जिम्मेदारी मुख्य अभियंता (मध्य क्षेत्र) रवि अग्रवाल ने उठाई। इसके बाद पूर्व अधिशासी अभियंता (रेजीडेंसी) जय प्रकाश के नेतृत्व में काम शुरू करा दिया गया।

❗ नियमों की खुली धज्जियां….
👉 न तो कोई स्टीमेट बना
👉 न कोई राशि जमा कराई गई
👉 न टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई
सीधे ठेकेदार पुनीत टंडन को काम करने का निर्देश….

काम में 400 केवीए ट्रांसफार्मर शिफ्ट किया गया, कई लाइनों को अंडरग्राउंड किया गया और पोल हटाए गए। जानकारों का कहना है कि यदि नियम के मुताबिक स्टीमेट बनता, तो भारती भवन को करीब 20 लाख रुपये जमा करने पड़ते। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

⚠️ अब ‘एक का तीन’ बनाकर बिल?
सूत्रों का आरोप है कि काम पूरा होने के बाद अब फर्जी तरीके से बिल बनाए जाएंगे—जहां एक काम को तीन दिखाकर भुगतान निकाला जाएगा। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन “लपेटने” की आशंका जताई जा रही है।

❓ सीधे सवाल, जिनका जवाब चाहिए
बिना स्टीमेट और टेंडर के काम किस आदेश पर कराया गया?
👉 किस नियम के तहत निजी संस्था के लिए सरकारी ढांचा बदला गया?
👉 भुगतान किस मद से और किसके हस्ताक्षर से होगा?
👉 जिम्मेदारी तय होगी या फिर फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा?

यूपीपीसीएल मीडिया यह सवाल उठाती है कि क्या उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में नियम सिर्फ आम उपभोक्ताओं पर लागू होते हैं? क्या प्रभावशाली संस्थाओं के लिए अलग कानून है?

🔴 अध्यक्ष पावर कॉरपोरेशन से मांग
👉 मामले की स्वतंत्र जांच
👉 दोषियों पर कठोर कार्रवाई
👉 स्टीमेट, भुगतान और फाइल नोटिंग सार्वजनिक की जाए
जब तक जवाब नहीं मिलते, तब तक सवाल जिंदा रहेंगे।

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