अमेरिका-इज़राइल की कड़ी चेतावनी के बीच ईरान पर हमले तेज, तेहरान में बड़े धमाके

तेहरान/वॉशिंगटन/तेल अवीव: मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़े सैन्य हमलों की चेतावनी दी है। इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान और आसपास के शहर कराज में जोरदार विस्फोटों की खबर सामने आई है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक, तेहरान के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है, जहां राहत और बचाव कार्य जारी है। हमलों में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा तक समझौता नहीं हुआ तो ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे—जैसे पुल और बिजली संयंत्र—को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि “अगर ईरान नहीं माना तो वह पाषाण युग में पहुंच जाएगा।”

वहीं, अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ‘ऑपरेशन फ्यूरी’ के तहत अब तक के “सबसे बड़े हमलों” की बात कही है। उन्होंने साफ किया कि आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं।

इज़रायली सेना ने भी ईरान की ओर से मिसाइल दागे जाने का दावा करते हुए अपनी एयर डिफेंस प्रणाली सक्रिय कर दी है। इसके जवाब में इज़राइल ने ईरान और लेबनान में हवाई हमले किए, जिसमें बेरूत में चार लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें तबाह हो गईं।

इस संघर्ष का असर खाड़ी देशों तक भी पहुंच रहा है। सऊदी अरब ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम से सात बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है, जबकि अल-जुबैल जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में आग लगने की खबर है। सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाले किंग फहद कॉज़वे पर यातायात रोक दिया गया है।

इधर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। दक्षिणी इज़राइल पर कई मिसाइलें दागी गईं, जिससे कई इलाकों में सायरन बजने लगे। साथ ही, ईरान ने अपने नागरिकों, खासकर युवाओं से ऊर्जा संयंत्रों के पास एकत्र होकर समर्थन दिखाने की अपील की है।

अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेहरान के एक यहूदी प्रार्थना स्थल को भी हमले में भारी नुकसान पहुंचा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

(आवाज़ प्लस )

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