नई दिल्ली/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच आखिरकार 2 हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति बन गई है। इस युद्धविराम के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। साउथ अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “इतिहास गवाह है कि हमने कभी युद्ध शुरू नहीं किया, न ही किसी पर आक्रमण किया और न ही निर्दोष बच्चों की हत्या की। हमने केवल अपनी मातृभूमि की रक्षा की है, जो हमारे लिए जीवन से भी बढ़कर है।”

ट्रंप का ऐलान और शर्तें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान पर अगले 2 हफ्तों तक कोई हमला नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जिस पर अमेरिका विचार कर रहा है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चीन की भूमिका ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में अहम रही है। इससे पहले उन्होंने पाकिस्तान को भी सीजफायर के लिए मध्यस्थता करने पर धन्यवाद दिया था।
ईरान की शर्तें और होर्मुज पर फैसला
ईरान ने युद्धविराम के बदले कुछ सख्त शर्तें रखी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से 20 लाख डॉलर तक का जुर्माना वसूला जा सकता है। हालांकि, सीजफायर की अवधि में सुरक्षित मार्ग देने की बात भी कही गई है, बशर्ते समन्वय और तय नियमों का पालन हो।
विदेश मंत्री का बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की 10 शर्तों के सामान्य ढांचे को बातचीत का आधार मान लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि ईरान पर हमले बंद रहते हैं, तो ईरानी सेना भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगी।
सुप्रीम लीडर का निर्देश
ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने भी तत्काल प्रभाव से हमले रोकने के निर्देश दिए हैं, जिससे क्षेत्र में फिलहाल तनाव कम होने की उम्मीद है।
क्या आगे बढ़ेगी शांति प्रक्रिया?
दो हफ्तों के इस अस्थायी सीजफायर को आगे स्थायी समझौते की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश इस अवसर को स्थायी शांति में बदल पाएंगे या फिर तनाव दोबारा बढ़ेगा।
