नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने एक बार फिर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का ऐलान किया गया।

आरबीआई ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.5% पर स्थिर रखा है। केंद्रीय बैंक ने अपने रुख को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत के अनुसार नीतियों में बदलाव की गुंजाइश बनी रहे।
मजबूत बनी हुई है अर्थव्यवस्था
गवर्नर मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए कहा कि देश की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मजबूत खपत, निवेश और संरचनात्मक सुधारों के चलते आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन मिल रहा है।
वैश्विक चुनौतियों पर नजर
हालांकि, आरबीआई ने वैश्विक जोखिमों को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधाएं महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इन परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आम आदमी पर असर
रेपो रेट में कोई बदलाव न होने का मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन या अन्य कर्जों की ब्याज दरों में राहत मिलने की उम्मीद कम है। बैंक भी अपनी लेंडिंग रेट्स में तुरंत कोई कटौती नहीं करेंगे।
पिछले साल मिली थी राहत
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में आरबीआई ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर आम लोगों को बड़ी राहत दी थी। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति जारी रखी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, आरबीआई का यह फैसला महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और महंगाई के रुख के आधार पर आगे की नीति तय होगी।
