जग्गी मर्डर केस: अमित जोगी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, 20 अप्रैल को सुनवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 20 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

हाई कोर्ट ने हाल ही में अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा का प्रावधान रखा गया है।

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 3 बाद में सरकारी गवाह बन गए। निचली अदालत ने 31 मई 2007 को अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाई कोर्ट भेज दिया, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद अमित जोगी को दोषी ठहराया गया।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद सतीश जग्गी ने न्याय मिलने पर संतोष जताया है। वहीं अमित जोगी ने इसे अपने खिलाफ “बड़ा अन्याय” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद जताई है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अदालत के फैसले को स्वागत योग्य बताया, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे न्यायालय का विषय बताते हुए टिप्पणी से परहेज किया।

23 साल पुराने इस मामले में आया यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेगी।

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