नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री डकैती और युद्ध जैसे खतरों के बीच केंद्र सरकार ने देश के समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMI Pool) के गठन को मंजूरी दे दी गई। इस योजना के तहत सरकार ने ₹12,980 करोड़ की सॉवरेन गारंटी देने का ऐलान किया है, जिससे भारतीय जहाजों को कठिन परिस्थितियों में भी निर्बाध बीमा कवर मिल सकेगा।

सरकार के इस कदम को समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब तक भारतीय शिपिंग कंपनियां बीमा के लिए विदेशी संस्थाओं, विशेषकर लंदन स्थित क्लबों, पर निर्भर थीं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संकट या प्रतिबंधों के दौरान ये कंपनियां बीमा देने से पीछे हट जाती थीं या प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी कर देती थीं, जिससे भारत के आयात-निर्यात पर असर पड़ता था।
क्या होगा बीएमआई पूल का दायरा?
यह घरेलू बीमा पूल समुद्री व्यापार से जुड़े लगभग सभी जोखिमों को कवर करेगा। इसमें जहाज को होने वाला भौतिक नुकसान, युद्ध या अशांत समुद्री क्षेत्रों से गुजरने का जोखिम, कार्गो का नुकसान, जहाज का मलबा हटाने का खर्च और चालक दल की सुरक्षा व वापसी से जुड़े खर्च शामिल होंगे। खास बात यह है कि यह कवर उन सभी जहाजों को मिलेगा जो भारत से बाहर जा रहे हैं या भारत आ रहे हैं, चाहे वे किसी भी जोखिम भरे समुद्री मार्ग से क्यों न गुजर रहे हों।
आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
इस पूल की अनुमानित अंडरराइटिंग क्षमता करीब ₹950 करोड़ होगी, जिसे सदस्य बीमा कंपनियां संयुक्त रूप से संचालित करेंगी। इससे न केवल बीमा से जुड़े दावों का निपटारा भारत में ही संभव होगा, बल्कि कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञता का भी विकास देश के भीतर होगा।
सॉवरेन गारंटी क्यों है अहम?
सरकार की ₹12,980 करोड़ की गारंटी इस योजना की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। किसी बड़े समुद्री हादसे या युद्ध जैसी स्थिति में बीमा भुगतान की अंतिम जिम्मेदारी सरकार की होगी, जिससे शिपिंग कंपनियों और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में अधिक सक्षम और लचीला बनाएगी, साथ ही विदेशी निर्भरता को कम कर देश के रणनीतिक हितों की रक्षा करेगी।
