लखनऊ/वॉशिंगटन:
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान खुद इस जलमार्ग को बंद नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे खुला रखना चाहता है ताकि वह रोजाना लगभग 500 मिलियन डॉलर की कमाई जारी रख सके। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में अमेरिका द्वारा लगाए गए ब्लॉकेड के कारण ही ईरान ऐसा बयान दे रहा है।

ट्रंप के अनुसार, “ईरान केवल अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए यह कह रहा है कि वह होर्मुज को बंद करना चाहता है, जबकि वास्तविकता यह है कि वह इसे खुला रखना चाहता है।”
सीजफायर बढ़ाने का ऐलान
इस बीच, अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में सीजफायर को एकतरफा रूप से बढ़ाने का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका के रणनीतिक दबाव में आने का संकेत हो सकता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी बातचीत की शुरुआत तभी होगी जब अमेरिकी ब्लॉकेड हटाया जाएगा।
ईरान अपने रुख पर कायम
ईरान ने अमेरिका के उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार है। तेहरान का स्पष्ट कहना है कि वह यूरेनियम संवर्धन और परमाणु गतिविधियों को जारी रखेगा।
ब्लॉकेड हटाने के संकेत
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने दावा किया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज से ब्लॉकेड हटाने पर विचार कर रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि वॉशिंगटन अब तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता तलाशने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
मिडिल-ईस्ट में दबाव में अमेरिका
खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाओं और ईरानी हमलों के चलते अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका अब इस संघर्ष से बाहर निकलने की रणनीति बना रहा है।
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव फिलहाल कम होता नहीं दिख रहा, लेकिन कूटनीतिक संकेत यह जरूर बताते हैं कि दोनों पक्ष किसी न किसी रूप में बातचीत की संभावनाओं को जीवित रखना चाहते हैं। आने वाले दिनों में ब्लॉकेड और सीजफायर पर लिए गए फैसले इस पूरे संकट की दिशा तय करेंगे।
