लखनऊ/नई दिल्ली | आवाज़ प्लस
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। अरब सागर में अमेरिकी नौसेना ने ईरान के एक कार्गो जहाज को रोककर उसे अपने कब्जे में ले लिया है। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच बना सीजफायर भी टूट गया है और हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी वीडियो के मुताबिक, यह घटना 19 अप्रैल की है, जब ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज एम/वी तौस्का होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहा था। अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance (DDG 111) ने जहाज को रोकने के लिए कई बार चेतावनी दी, लेकिन जहाज ने इन निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया।
6 घंटे तक चेतावनी, फिर हुई फायरिंग
अमेरिका का दावा है कि करीब छह घंटे तक जहाज को लगातार चेतावनी दी गई। इसके बावजूद जब जहाज नहीं रुका, तो अमेरिकी युद्धपोत ने 5-इंच की MK-45 तोप से फायरिंग कर जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया। इससे जहाज की प्रोपल्शन प्रणाली ठप हो गई और वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।
इसके बाद अमेरिकी मरीन बलों ने ऑपरेशन को अंजाम देते हुए जहाज पर कब्जा कर लिया।
हेलीकॉप्टर से फिल्मी अंदाज़ में बोर्डिंग
अमेरिका ने 20 अप्रैल को एक और वीडियो जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि USS Tripoli (LHA 7) से उड़ान भरकर अमेरिकी मरीन हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज तक पहुंचे और रस्सियों के सहारे (रैपलिंग) उतरकर जहाज पर कब्जा कर लिया। यह ऑपरेशन पूरी तरह सैन्य रणनीति और सटीक समन्वय का उदाहरण बताया जा रहा है।
ईरान का पलटवार का दावा
इस कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाने का दावा किया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि उसने अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बढ़ता खतरा, वैश्विक चिंता
इस घटना के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य और अरब सागर में तनाव काफी बढ़ गया है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, ऐसे में किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संघर्ष बड़े युद्ध का रूप भी ले सकता है।
(आवाज़ प्लस के लिए विशेष रिपोर्ट)
