ईरान में IRGC का बढ़ता कब्ज़ा, कूटनीति पर सैन्य हावी—पश्चिम से बातचीत मुश्किल

आवाज़ प्लस | अंतरराष्ट्रीय डेस्क

ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश के सैन्य और कूटनीतिक फैसलों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि IRGC अब शीर्ष स्तर के निर्णयों को सीधे प्रभावित कर रहा है, जिससे ईरान की नीति में सख्ती साफ़ तौर पर देखी जा रही है।

बताया जा रहा है कि IRGC कमांडर अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने नेतृत्व की अहम भूमिकाएं संभाल ली हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव चरम पर है और अमेरिका के साथ बातचीत लगभग ठप पड़ चुकी है।

लिबरल नेताओं को किया गया किनारे

वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कई अपेक्षाकृत नरम रुख वाले नेताओं को निर्णय प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है। अराघची ने हाल ही में अमेरिका के साथ वार्ता के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का संकेत दिया था, लेकिन IRGC ने इस फैसले को पलटते हुए इसे बंद रखने पर ज़ोर दिया।

सुप्रीम काउंसिल में भी बढ़ा प्रभाव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRGC को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र का समर्थन मिला है। इससे सैन्य और रणनीतिक मामलों में IRGC की पकड़ और मजबूत हो गई है। कूटनीतिक टीम में भी उनके प्रभाव के चलते मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ज़ोलघाद्र ने IRGC नेतृत्व से शिकायत की थी कि अराघची ने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ को लेकर नरम रुख अपनाया, जो संगठन की रणनीति के खिलाफ है। इसके बाद वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया।

होर्मुज़ में तनाव और बढ़ा

इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में हालात और बिगड़ गए हैं। ईरान द्वारा इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज़ों पर हमले किए जाने की खबर है। दो भारतीय जहाजों पर भी फायरिंग की गई, जिससे फारसी खाड़ी में सैकड़ों जहाज़ फंस गए हैं।

अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के एक कार्गो शिप को अपने कब्जे में ले लिया है। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं।

बातचीत की संभावनाएं कमजोर

विश्लेषकों का मानना है कि अब अहमद वाहिदी और मुज्तबा खामेनेई जैसे सख्त रुख वाले नेता ईरान में प्रमुख निर्णयकर्ता बनकर उभरे हैं। इससे पश्चिमी देशों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत की संभावना काफी कम हो गई है।

नई वार्ता के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आई है, जिससे यह भी अनिश्चित बना हुआ है कि मौजूदा संघर्ष विराम आगे जारी रहेगा या नहीं।

ईरान की सत्ता में IRGC के बढ़ते दखल ने न केवल आंतरिक राजनीतिक संतुलन बदल दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में यह स्थिति वैश्विक राजनीति और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाल सकती है।

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