मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने अमेरिका समेत पूरी दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए ईरान के विमानों को अपने एयरफील्ड्स पर पार्क करने की अनुमति दी थी।

अमेरिकी मीडिया संस्थान CBS News ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को सुरक्षित ठिकाना देने में मदद की। बताया जा रहा है कि ईरान ने अपने कुछ सैन्य और खुफिया विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजा था, ताकि अमेरिकी हमलों से उन्हें बचाया जा सके।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान में भी खड़ा किया था। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीचोंबीच स्थित है और वहां बड़ी संख्या में विमानों को छिपाना संभव नहीं है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के नए सीजफायर प्रस्ताव को “बेहद बेवकूफी भरा” बताते हुए ठुकरा दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका इस टकराव में पूरी तरह जीत हासिल करेगा और ईरान पर दबाव लगातार बढ़ाया जाएगा।
पाकिस्तान की कथित भूमिका सामने आने के बाद अमेरिका में भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर ये रिपोर्ट सही है, तो अमेरिका को पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर दोबारा विचार करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के पुराने बयानों को देखते हुए इस तरह की खबरें चौंकाने वाली नहीं हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान दोहरी नीति अपना रहा है? एक तरफ वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान की मदद करने के आरोपों में घिरता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।
