पूरे साल की कमाई पर संकट! 3 महीने का नुकसान बढ़ा रहा पेट्रोलियम कंपनियों की टेंशन

देश की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहने की वजह से कंपनियों का घाटा तेजी से बढ़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सिर्फ तीन महीने का नुकसान पूरे साल का मुनाफा खत्म कर सकता है।

रोजाना 1200 करोड़ रुपये तक का नुकसान

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited — इस समय भारी अंडर रिकवरी झेल रही हैं। बताया जा रहा है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को हर दिन करीब 1200 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है।

2 साल पुराने रेट पर बिक रहा पेट्रोल-डीजल

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल आया है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग दो साल पुराने स्तर पर बनी हुई हैं। वहीं एलपीजी सिलेंडर के दाम में मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन कंपनियों का कहना है कि मौजूदा कीमतें अभी भी लागत से काफी कम हैं।

1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है घाटा

जानकारों के अनुसार, अप्रैल से जून तिमाही के दौरान होने वाला नुकसान कंपनियों के पूरे साल के करीब 76 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित मुनाफे को खत्म कर सकता है। अगर मार्च महीने के नुकसान को भी जोड़ लिया जाए, तो कुल घाटा लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

हर लीटर पर हो रहा भारी नुकसान

बताया जा रहा है कि कंपनियां इस समय पेट्रोल पर करीब 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर करीब 674 रुपये तक का घाटा उठा रही हैं।

लंबे समय तक ऐसे हालात रहे तो बढ़ सकती है मुश्किल

ICRA Limited के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक ऐसे हालात बने रहने पर पेट्रोलियम कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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