भिवानी शिक्षिका केस: सलवार फटी, नाड़ा खुला, संघर्ष के निशान – पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई सवाल; पुलिस आत्महत्या बता रही, परिवार ने CBI जांच की मांग की

हरियाणा के भिवानी जिले में 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की मौत ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। 11 अगस्त को स्कूल से निकलने के बाद वह नर्सिंग कॉलेज में दाखिले के बारे में पूछताछ करने गई थी। इसके बाद वह लापता हो गई। 13 अगस्त को उसका आंशिक रूप से सड़ा हुआ शव खेत में मिला।

इस मामले में सबसे बड़ा विवाद यह है कि जहां पुलिस इसे जहर खाकर आत्महत्या बता रही है, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कपड़ों की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

🔎 पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अगस्त की शाम पहली बार किए गए पीएम (पोस्टमार्टम) में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • मृतका की सलवार आगे से फटी हुई थी और नाड़ा खुला हुआ था।
  • कपड़ों पर संघर्ष के निशान पाए गए।
  • शरीर पर लाल और अनियमित चोटों के निशान थे।
  • रिपोर्ट में लिखा गया कि चोटें तब दी गई थीं, जब पीड़िता जिंदा थी।
  • गले पर धारदार हथियार से वार और काटने के निशान भी दर्ज किए गए।

पुलिस ने डॉक्टरों को शुरुआती रिपोर्ट में बताया था कि मामला यौन उत्पीड़न और गला रेतकर हत्या जैसा लग रहा है।

🏥 तीन बार पोस्टमार्टम

  1. पहली बार – भिवानी सिविल अस्पताल में (13 अगस्त)
  2. दूसरी बार – रोहतक के पीजीआईएमएस में
  3. तीसरी बार – दिल्ली AIIMS में (परिवार और ग्रामीणों के दबाव पर)

तीसरी बार पीएम रिपोर्ट के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया।

👮 पुलिस का दावा

पुलिस की ओर से बयान आया कि जांच में यह आत्महत्या का मामला है।

  • अधिकारियों का कहना है कि मनीषा ने जहर खाया था।
  • हत्या या यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं हुई।

👨‍👩‍👧 परिवार का आरोप

मनीषा के पिता संजय ने पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह खारिज किया।
उनका कहना है:

  • “मेरी बेटी कभी आत्महत्या नहीं कर सकती।”
  • “उसकी हत्या हुई है। हमें न्याय चाहिए।”
  • परिवार और ग्रामीणों ने CBI जांच की मांग की।

गांव ढाणी लक्ष्मण में ग्रामीणों ने धरना दिया और शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

⚖️ अब क्या आगे?

  • राज्य सरकार केस को CBI को सौंपने की तैयारी में है।
  • दिल्ली AIIMS की रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई और साफ़ हो सकती है।
  • फिलहाल पुलिस और परिवार के दावों में भारी विरोधाभास है।

🔍 निष्कर्ष

भिवानी शिक्षिका केस सिर्फ़ एक मौत की गुत्थी नहीं है, बल्कि यह जांच की पारदर्शिता और महिला सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

  • अगर यह आत्महत्या है, तो कपड़े फटे और संघर्ष के निशान क्यों?
  • अगर हत्या है, तो पुलिस आत्महत्या की थ्योरी क्यों दे रही है?
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