नंदीग्राम बना फिर हाई-वोल्टेज सीट: शुभेंदु अधिकारी बनाम पबित्र कर, कौन मारेगा बाज़ी?

कोलकाता/नंदीग्राम | आवाज़ प्लस

पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित विधानसभा सीट नंदीग्राम एक बार फिर सियासी संग्राम का केंद्र बन गई है। 2026 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार पबित्र कर आमने-सामने हैं। खास बात यह है कि कभी शुभेंदु अधिकारी के करीबी रहे पबित्र कर अब उनके खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।

इतिहास और सियासी अहमियत

नंदीग्राम सीट का राजनीतिक इतिहास बेहद रोचक रहा है। यहां अब तक 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 9 बार जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखा। इसके बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भी यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। भाजपा को इस सीट पर पहली सफलता साल 2021 में मिली थी, जब शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में 1,956 वोटों से हराया था।

पाला बदलकर चुनौती

इस बार चुनावी मुकाबला इसलिए भी खास हो गया है क्योंकि पबित्र कर, जो कभी शुभेंदु अधिकारी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते थे, अब टीएमसी के टिकट पर उन्हें सीधी चुनौती दे रहे हैं। उनके इस कदम ने नंदीग्राम की सियासत में नया मोड़ ला दिया है।

पबित्र कर का हमला

पबित्र कर ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की आवाज नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम में राजनीतिक द्वेष के चलते लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे जनता में नाराजगी है।
उन्होंने यह भी कहा,
“तृणमूल कांग्रेस मेरा पुराना घर है और मैं अपने घर लौटा हूं। मैं किसी के सामने झुकने वाला नहीं हूं।”

क्या दोहराएंगे शुभेंदु 2021 का इतिहास?

नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की थी। ऐसे में भाजपा एक बार फिर इस सीट को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

कड़ा मुकाबला तय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम में इस बार मुकाबला बेहद करीबी और रोमांचक होगा। एक तरफ शुभेंदु अधिकारी का मजबूत जनाधार और संगठन है, तो दूसरी तरफ पबित्र कर की वापसी और टीएमसी का कैडर।

नंदीग्राम की लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि साख और वर्चस्व की लड़ाई बन चुकी है। अब देखना होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है—अनुभवी शुभेंदु अधिकारी या चुनौती देने उतरे पबित्र कर।

(आवाज़ प्लस)

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