“5 दिन में माफी मांगो, नहीं तो गोबर से भरवा दूंगा घर” — BJP विधायक की धमकी से मचा बवाल

शिवपुरी (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक प्रीतम लोधी का एक विवादित बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। विधायक पर आरोप है कि उन्होंने एक पुलिस अधिकारी (SDOP) को खुलेआम धमकी देते हुए पांच दिन के भीतर माफी मांगने को कहा। इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो उनका घर गोबर से भरवा दिया जाएगा।

बेटे के खिलाफ कार्रवाई से नाराज़गी
पूरा मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें विधायक के बेटे दिनेश लोधी पर थार गाड़ी से पांच लोगों को कुचलने का आरोप है। इस मामले की जांच के दौरान SDOP द्वारा की गई कार्रवाई से नाराज़ होकर विधायक ने यह धमकी दी। आरोप है कि विधायक ने कहा कि वह 10 हजार लोगों के साथ अधिकारी के घर पहुंचेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे।

पुलिस महकमे में बढ़ी चिंता
विधायक के इस बयान के बाद पुलिस विभाग में चिंता का माहौल है। अधिकारियों का मानना है कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह खुलेआम धमकी देना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

पीएम और गृह मंत्री का भी लिया नाम
विवाद उस समय और गहरा गया जब विधायक ने पुलिस अधिकारी से सवाल करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का नाम भी लिया। इससे मामले को राजनीतिक रंग मिल गया है और बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कांग्रेस का हमला, FIR की मांग
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना लाज़िमी है। पार्टी ने विधायक के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।

पुलिस की कार्रवाई जारी
शिवपुरी के करेरा क्षेत्र में 16 अप्रैल को हुई दुर्घटना में पांच लोग घायल हुए थे। पुलिस ने आरोपी दिनेश लोधी को थाने बुलाकर पूछताछ की और घटनास्थल का निरीक्षण कराया। जांच के दौरान थार गाड़ी में काली फिल्म और अवैध हूटर मिलने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान किया गया है।

आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया
पुलिस के अनुसार, दिनेश लोधी के खिलाफ पहले से ही ग्वालियर में मारपीट सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। साथ ही उनका ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सत्ता, कानून और प्रशासन के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा कसता है।

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