⚖️ 15 साल की रेप पीड़िता को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी 31 हफ्ते में अबॉर्शन की अनुमति

🟥 Aawaz Plus | ब्रेकिंग न्यूज़

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ा और मानवीय फैसला सुनाया है। 15 वर्षीय रेप पीड़िता को 31 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा— “कल्पना कीजिए उस 15 साल की बच्ची के दर्द की…”। कोर्ट ने साफ किया कि रेप से उत्पन्न गर्भ के मामलों में समय सीमा बाधा नहीं बननी चाहिए।

🧑‍⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी

  • रेप पीड़िता पर अनचाहा गर्भ थोपना अन्याय
  • कानून को समय के साथ अपडेट करने की जरूरत
  • अंतिम निर्णय पीड़िता और उसके परिवार का होना चाहिए

🏥 एम्स की दलील पर कोर्ट नाराज़

AIIMS की ओर से गर्भपात का विरोध करते हुए कहा गया कि:

  • बच्चा जीवित जन्म ले सकता है, लेकिन गंभीर विकृतियों के साथ
  • नाबालिग मां के स्वास्थ्य पर स्थायी असर पड़ सकता है

इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पीड़िता की मानसिक और सामाजिक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

💬 “बच्ची को मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकते”

कोर्ट ने कहा:

“यह एक 15 साल की बच्ची है, जिसे इस समय पढ़ाई करनी चाहिए, न कि मां बनने के लिए मजबूर किया जाए।”

📌 बड़ा संदेश

यह फैसला सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा संकेत है कि रेप पीड़िताओं के अधिकार और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानून में बदलाव पर भी विचार करने को कहा है।

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