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दुनिया एक बार फिर अस्थिरता के दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा चिंताओं के बीच देशों का झुकाव तेजी से सैन्य ताकत बढ़ाने की ओर हो रहा है। ताज़ा आंकड़े इस ट्रेंड को साफ तौर पर दर्शाते हैं।

📊 रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा वैश्विक सैन्य खर्च
Stockholm International Peace Research Institute की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 2.88 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 2.9% ज्यादा है।
इसका मतलब है कि दुनिया का हर व्यक्ति औसतन 350 डॉलर रक्षा पर खर्च कर रहा है।
🌐 5 देश करते हैं सबसे ज्यादा खर्च
वैश्विक सैन्य खर्च का लगभग 58% हिस्सा सिर्फ 5 देशों के पास है:
- United States – 954 अरब डॉलर
- China – 336 अरब डॉलर
- Russia – 190 अरब डॉलर
- Germany – 114 अरब डॉलर
- India – 92 अरब डॉलर
इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक सुरक्षा समीकरण कुछ बड़े देशों के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है।
🇺🇸 अमेरिका सबसे आगे, ऐतिहासिक बढ़त कायम
United States लंबे समय से दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बना हुआ है।
- 1949 से अब तक अमेरिका करीब 53.5 ट्रिलियन डॉलर रक्षा पर खर्च कर चुका है
- यह वैश्विक कुल खर्च का आधे से भी ज्यादा माना जाता है
⚔️ क्रीमिया के बाद यूरोप में तेजी
2014 में Annexation of Crimea के बाद यूरोप में सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं।
इसके बाद NATO देशों ने रक्षा बजट को GDP के 2% तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया, जिससे यूरोप में सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है।
👤 प्रति व्यक्ति खर्च में कतर सबसे आगे
- Qatar – 5428 डॉलर प्रति व्यक्ति
- Israel – दूसरा स्थान
- Norway – तीसरा स्थान
वहीं Ukraine में जारी युद्ध के कारण रक्षा खर्च में सबसे तेज़ बढ़ोतरी देखी गई हैनिष्कर्ष: क्या दुनिया नई हथियार दौड़ की ओर?
लगातार बढ़ता सैन्य खर्च यह संकेत देता है कि दुनिया फिर से सुरक्षा संकट और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर रही है।
देश अपनी सैन्य ताकत मजबूत करने में जुटे हैं—लेकिन इससे वैश्विक शांति पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
हथियारों की यह दौड़ सिर्फ ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि बढ़ती असुरक्षा की निशानी भी है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि दुनिया सहयोग की राह चुनेगी या संघर्ष की।
