महाभारत की ‘द्रौपदी’ बनीं सियासत की शेरनी: रूपा गांगुली ने बंगाल चुनाव में रचा इतिहास

लखनऊ/कोलकाता | आवाज़ प्लस

टीवी की दुनिया में अपनी सशक्त पहचान बनाने वाली और महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाकर घर-घर में मशहूर हुईं रूपा गांगुली अब राजनीति के अखाड़े में भी अपना लोहा मनवा रही हैं। कभी पर्दे पर न्याय की गुहार लगाने वाली यह अभिनेत्री आज पश्चिम बंगाल की सियासत में दमदार आवाज बन चुकी हैं।

अदाकारी से राजनीति तक का सफर

रूपा गांगुली ने अपने करियर की शुरुआत अभिनय से की और जल्दी ही भारतीय टेलीविजन की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उन्होंने न सिर्फ हिंदी बल्कि बंगाली सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। दिग्गज निर्देशकों के साथ काम करते हुए उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ एक ग्लैमरस चेहरा नहीं बल्कि गंभीर कलाकार भी हैं।

गायन में भी हासिल किया मुकाम

कम ही लोग जानते हैं कि रूपा गांगुली एक बेहतरीन गायिका भी हैं। उनकी आवाज में भावनात्मक गहराई झलकती है, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया जा चुका है।

राजनीति में एंट्री और संघर्ष

साल 2015 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। उस समय बंगाल में पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही थी और रूपा गांगुली उसके प्रमुख चेहरों में उभरकर सामने आईं।
उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया, रैलियों में हिस्सा लिया और कई बार विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हमलों का सामना भी किया।

ममता सरकार को सीधी चुनौती

रूपा गांगुली ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को लगातार चुनौती दी। महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने आक्रामक रुख अपनाया।

चुनाव में ऐतिहासिक जीत

पश्चिम बंगाल के सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए रूपा गांगुली ने बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने करीब 35,782 वोटों के अंतर से जीत हासिल की और कुल 1,28,970 वोट अपने नाम किए। इस मुकाबले में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार अरुंधति मैत्रा को हराया।

नई पहचान: अभिनेत्री से जननेता तक

आज रूपा गांगुली सिर्फ ‘द्रौपदी’ नहीं, बल्कि एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में जानी जाती हैं। उन्होंने साबित किया है कि कला और राजनीति दोनों में समान दृढ़ता और समर्पण के साथ सफलता हासिल की जा सकती है।

ग्लैमर की दुनिया से निकलकर राजनीति के कठिन रास्ते पर चलना आसान नहीं होता, लेकिन रूपा गांगुली ने यह कर दिखाया। उनका यह सफर आने वाले समय में कई कलाकारों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

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