पूर्व NSG कमांडो से बना ड्रग माफिया: 26/11 में आतंकियों से लड़ा, अब 200 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार

राजस्थान ATS और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक चौंकाने वाली सफलता हासिल की है। जिस शख्स ने कभी मुंबई के ताज होटल में 26/11 हमले के दौरान आतंकियों से मोर्चा लिया था, वही आज गांजा तस्करी के बड़े खेल का सरगना निकला।

कौन है बजरंग सिंह?

  • राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी के कारंगा गांव का निवासी।
  • कभी BSF से होते हुए NSG कमांडो बना।
  • 26/11 ऑपरेशन में ताज होटल पर आतंकियों से लड़ा।
  • 7 साल तक आतंकवाद-रोधी अभियानों का हिस्सा रहा।
  • 2021 में रिटायरमेंट के बाद राजनीति में किस्मत आजमाई, असफल होने पर अपराध की दुनिया में कदम रख दिया।

कैसे हुआ गिरफ़्तार?

  • बजरंग सिंह लंबे समय से ओडिशा और तेलंगाना से गांजे की बड़ी-बड़ी खेप राजस्थान मंगाकर नेटवर्क चला रहा था।
  • वह मोबाइल का कम इस्तेमाल करता, लगातार ठिकाने बदलता और किसी पर भरोसा नहीं करता था।
  • महीनों की ट्रैकिंग और निगरानी के बाद ATS ने फिल्मी अंदाज़ में उसे धर दबोचा।
  • गिरफ्तारी के समय उसके पास से 200 किलो गांजा बरामद हुआ।
  • उस पर पहले से ₹25,000 का इनाम घोषित था।

अपराध की राह क्यों?

  • गांव लौटने पर पत्नी को प्रधान का चुनाव लड़वाया, लेकिन हार मिली।
  • राजनीति में असफल रहने के बाद पुराने संपर्कों के सहारे तस्करी शुरू की।
  • छोटे सौदों की बजाय क्विंटल लेवल की खेपों का कारोबार करता था।

NSG की अहमियत

  • नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) भारत की सबसे प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स है।
  • 1986 में बनी, जिसका मकसद आतंकवाद, बंधक संकट और हाई-रिस्क ऑपरेशन्स से निपटना है।
  • इसे दुनिया की एलिट फोर्सेज़ – ब्रिटेन की SAS और जर्मनी की GSG-9 – की तर्ज पर तैयार किया गया है।

📌 निचोड़:
बजरंग सिंह की गिरफ्तारी एक विरोधाभास भरी कहानी है—एक समय देश का हीरो रहा कमांडो अब अपराध की गिरफ्त में है। राजस्थान ATS की यह कार्रवाई नशे के कारोबार पर कड़ा प्रहार मानी जा रही है।

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