भारत की एविएशन इंडस्ट्री इन दिनों इंडिगो संकट, पायलटों की कमी और हजारों उड़ानों के कैंसिल होने को लेकर सुर्खियों में है। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि इस पूरी स्थिति की गंभीरता बढ़ाने में DGCA के कुछ इंस्पेक्टर्स की लापरवाही भी शामिल थी। सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए चार DGCA इंस्पेक्टर्स को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया है।
यह फैसला एविएशन सेक्टर में भारी हलचल पैदा कर रहा है।
🔍 DGCA क्या है और इसका रोल क्यों महत्वपूर्ण है?
DGCA यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन, भारत में उड़ान सुरक्षा और एयरलाइंस रेगुलेशन का सबसे बड़ा प्रहरी है।
- पायलटों के ड्यूटी आवर्स,
- रेस्ट रूल्स,
- एयरलाइंस की तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता,
- और सुरक्षा पालन
की जांच DGCA की सीधी जिम्मेदारी है।
पिछले महीनों में पायलटों की थकान (fatigue) से जुड़े मुद्दों ने DGCA को नए रेस्ट रूल्स लागू करने के लिए मजबूर किया था।
🛫 Indigo पर विशेष निगरानी क्यों?
इंडिगो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है, जिसकी मार्केट हिस्सेदारी 65% से भी ज्यादा है।
इसलिए नए नियम लागू करने से पहले DGCA ने चार इंस्पेक्टर्स को लगाया था —
ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इंडिगो के पास
- पर्याप्त पायलट,
- पर्याप्त बैकअप,
और - रेस्ट रूल्स लागू करने की तैयारी
पूरी है।
लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि ये इंस्पेक्टर्स अपना काम ठीक से ही नहीं कर रहे थे।
❌ किन इंस्पेक्टर्स को नौकरी से निकाला गया?
ET की रिपोर्ट के अनुसार जिन चार इंस्पेक्टर्स को बाहर किया गया, उनके नाम हैं—
- ऋषि राज चटर्जी
- सीमा झमनानी
- अनिल कुमार पोखरियाल
- प्रियम कौशिक
DGCA ने इन्हें “टर्मिनेट” किया है — यानी तत्काल नौकरी से बाहर।
💥 असली विवाद: क्या DGCA इंडिगो को लेकर ‘नरम’ था?
कई विशेषज्ञ सीधे सवाल उठा रहे हैं कि—
- जब इंडिगो के पास पहले ही पायलटों की कमी थी,
- जब उसे हजारों उड़ानें कैंसिल करनी पड़ीं,
- जब एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी थी,
तो DGCA इस संकट को पहले क्यों नहीं भांप सका?
जानकारों के मुताबिक, नए रेस्ट रूल्स लागू करने के लिए इंडिगो तैयार ही नहीं थी, लेकिन DGCA इंस्पेक्टर्स ने ऑडिट ठीक से नहीं किया।
कई विशेषज्ञ इसे
👉 “रेगुलेटर की विफलता”
करार दे रहे हैं।
📌 DGCA के पायलट इंस्पेक्टर्स कैसे काम करते हैं?
- ये सभी सक्रिय पायलट होते हैं
- 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर होते हैं
- इस दौरान वे कोई कमर्शियल फ्लाइट नहीं उड़ा सकते
- इनका काम सिर्फ निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट करना होता है
लेकिन इंडिगो मामले में इनकी रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठे हैं।
⚡ मंत्री नायडू की मॉनिटरिंग के बावजूद चूक कैसे?
एयर इंडिया हादसे के बाद,
नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू हर महीने एयरलाइंस के साथ बैठक कर रहे हैं।
फिर भी इंडिगो जैसी विशाल एयरलाइन की पायलट-शॉर्टेज और तैयारी की कमी मंत्री और DGCA दोनों की मॉनिटरिंग से बच कैसे गई?
सरकार भी इस पर “चूक” मान रही है।
✈ सरकार ने इंडिगो की उड़ानों में 10% कटौती का आदेश दिया
हजारों फ्लाइट कैंसिल करने के बाद अब सरकार ने इंडिगो को
👉 10% उड़ानें कम करने का आदेश दिया है।
क्यों?
क्योंकि नए रेस्ट रूल्स लागू होने के बाद
- इंडिगो के पास पर्याप्त पायलट नहीं थे
- और वह ड्यूटी और रेस्ट बैलेंस नहीं संभाल पा रही थी।
🚨 यह पूरा संकट क्यों बड़ा मुद्दा है?
- DGCA की विश्वसनीयता दांव पर
- इंडिगो की परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित
- यात्रियों को भारी परेशानी
- एयरलाइन क्रू की थकान और सुरक्षा पर सवाल
- और यह आरोप कि इंडिगो को “फेवर” किया जा रहा था
चार इंस्पेक्टर्स की बर्खास्तगी इस पूरे मामले का एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश है।
आवाज़ प्लस विशेष रिपोर्ट
