पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। 8 जनवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इनकम टैक्स विभाग द्वारा इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) के कोलकाता कार्यालय पर की गई कार्रवाई ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। इस छापेमारी को लेकर जहां एक ओर जांच एजेंसियां वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है।
क्या है पूरा मामला
सूत्रों के मुताबिक, ईडी और इनकम टैक्स की संयुक्त टीम ने I-PAC के कोलकाता ऑफिस में दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े डेटा की जांच की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कथित तौर पर फंडिंग, टैक्स अनुपालन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई।
हालांकि, एजेंसियों की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन कार्रवाई की खबर सामने आते ही बंगाल की राजनीति गरमा गई।
TMC का हमला: “राजनीतिक प्रतिशोध”
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इस छापेमारी को सीधे तौर पर केंद्र सरकार से जोड़ते हुए कहा कि यह विपक्षी दलों और उनसे जुड़े संगठनों को डराने की कोशिश है। TMC का आरोप है कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या राज्य सरकार केंद्र के खिलाफ मुखर होती है, तब केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि I-PAC एक पेशेवर राजनीतिक रणनीति संस्था है और उस पर कार्रवाई कर बंगाल की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
बीजेपी का पलटवार
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि किसी संस्था या व्यक्ति ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो जांच एजेंसियों की कार्रवाई पूरी तरह जायज है। उन्होंने TMC पर जांच से बचने के लिए “पीड़ित राजनीति” करने का आरोप लगाया।
I-PAC की भूमिका और राजनीतिक असर
I-PAC देश की जानी-मानी राजनीतिक रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट संस्था मानी जाती है, जिसने अलग-अलग राज्यों और दलों के साथ काम किया है। ऐसे में इसके कोलकाता ऑफिस पर हुई कार्रवाई का असर सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई से बंगाल में पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल और अधिक गरम हो सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक गूंजने की संभावना है।
