कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, सदस्यता समाप्त; कानूनी लड़ाई की तैयारी

नई दिल्ली/भोपाल। ग्रामीण बैंक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती और सह-आरोपी रघुबीर शरण प्रजापति को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। अदालत ने भारती पर 1 लाख रुपये और प्रजापति पर कुल 2.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) दिग विनय सिंह ने दोनों को धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया।

इन धाराओं में हुई सजा
अदालत ने राजेंद्र भारती को आईपीसी की धारा 120बी के साथ 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी पाया। वहीं रघुबीर शरण प्रजापति को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई गई, जिसमें जालसाजी और धोखाधड़ी के मामलों में कुल तीन साल की कैद और 2.5 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है।

क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2015 में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। आरोप के अनुसार, 1998 में सावित्री श्याम ने एक ट्रस्ट के नाम पर 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी। लेकिन मैच्योरिटी से पहले ही 1999 से 2011 तक हर साल ब्याज निकाला गया, जो नियमों के खिलाफ था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि ट्रस्ट से जुड़े होने के कारण राजेंद्र भारती ने करीब 18.5 लाख रुपये अवैध रूप से ब्याज के रूप में निकाले।

विधायक पद खत्म, सीट खाली घोषित
तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और संविधान के प्रावधानों के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। निर्वाचन आयोग को भी इसकी सूचना भेज दी गई है, जिसके बाद अब इस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

कांग्रेस कानूनी विकल्पों पर सक्रिय
सदस्यता बचाने के लिए कांग्रेस ने कानूनी तैयारी तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तंखा हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं। पार्टी की कोशिश सजा पर स्थगन (स्टे) लेने की होगी, जिससे सदस्यता बहाल हो सके।

राजनीतिक असर
दतिया सीट से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले से क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

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