कोलकाता/नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग (EC) ने पहली बार जिलावार नई वोटर लिस्ट जारी की है, जिसमें अब तक 91 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं। इस कदम ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, कुल 60,06,675 मतदाता जांच के दायरे में थे, जिनमें से 27,16,393 नाम हटाए गए हैं। इससे पहले 28 फरवरी को जारी प्रारंभिक सूची में 63,66,952 नाम हटाए गए थे। अब कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या बढ़कर 90,83,345 से अधिक हो गई है।
आयोग ने यह भी बताया कि 59,84,512 मतदाताओं का विवरण प्रकाशित किया जा चुका है, जबकि 22,163 मामलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और डिजिटल हस्ताक्षर लंबित हैं। इनके जुड़ने के बाद हटाए गए नामों की संख्या और बढ़ सकती है।
जिलावार आंकड़े क्या कहते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए हैं, जहां करीब 4.55 लाख मतदाताओं को अयोग्य घोषित किया गया। इसके बाद उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख, मालदा में 2.39 लाख और दक्षिण 24 परगना में लगभग 2.22 लाख नाम हटाए गए हैं।
नादिया में करीब 2.08 लाख, उत्तर दिनाजपुर में 1.76 लाख और हुगली में 1.20 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं। वहीं पश्चिम बर्धमान में 74 हजार और बीरभूम में लगभग 82 हजार नाम हटाए गए हैं।
योग्य-अयोग्य का वर्गीकरण पहली बार
चुनाव आयोग ने पहली बार मतदाताओं को योग्य और अयोग्य श्रेणियों में बांटते हुए विस्तृत जिलावार आंकड़े जारी किए हैं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, 60 लाख से अधिक विचाराधीन मतदाताओं में से 32 लाख से ज्यादा को योग्य और करीब 27 लाख को अयोग्य घोषित किया गया है।
अपील का मिलेगा मौका
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम सूची जारी करने से पहले हर नाम की विधिवत जांच की गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अयोग्य घोषित किए गए मतदाताओं को न्यायिक न्यायाधिकरण में अपील करने का मौका दिया जाएगा।
आवाज़ प्लस रिपोर्ट
मतदाता सूची में इतने बड़े स्तर पर नाम हटाए जाने से राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। अब देखना होगा कि इस फैसले का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ता है।
