सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव: उत्तर कोरिया ने दागीं मिसाइलें, दक्षिण कोरिया में हड़कंप

सियोल/प्योंगयांग: एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबर से वैश्विक स्तर पर राहत की भावना देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया ने एक बार फिर मिसाइल परीक्षण कर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। किम जोंग उन के नेतृत्व वाले उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट से कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे दक्षिण कोरिया में हड़कंप मच गया।

दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, ये मिसाइलें वॉनसन क्षेत्र से दागी गईं और करीब 240 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पूर्वी समुद्र में गिरीं। पिछले दो दिनों में यह दूसरा मिसाइल परीक्षण है, जिससे उत्तर कोरिया की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दक्षिण कोरियाई सेना ने बताया कि इससे एक दिन पहले राजधानी प्योंगयांग के आसपास से भी एक अज्ञात मिसाइल प्रक्षेपण का पता चला था। इस घटना का विश्लेषण दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां मिलकर कर रही हैं।

असफल रहा पिछला परीक्षण?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया परीक्षणों में से एक मिसाइल लॉन्च के शुरुआती चरण में ही असामान्य गतिविधि दिखाते हुए रडार से गायब हो गई, जिससे इसके असफल होने की आशंका जताई जा रही है।

तनावपूर्ण रिश्ते, बातचीत की उम्मीद कमजोर
उत्तर कोरिया ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दक्षिण कोरिया के साथ संबंध सुधारने के मूड में नहीं है। वहीं दक्षिण कोरिया की सरकार लगातार बातचीत बहाल करने की कोशिशों में लगी हुई है।

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जांग कुम चोल ने दक्षिण कोरिया को “सबसे बड़ा दुश्मन” बताते हुए तीखा बयान दिया और उसके नेतृत्व का मजाक भी उड़ाया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्योंगयांग अपनी सख्त नीति से पीछे हटने वाला नहीं है।

ड्रोन विवाद और चेतावनी
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग द्वारा कथित ड्रोन उड़ानों पर खेद जताने के बाद भी उत्तर कोरिया ने सख्त रुख बनाए रखा है। किम जोंग उन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी गतिविधियां दोहराई गईं तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा उत्तर कोरिया
2019 में अमेरिका के साथ कूटनीतिक वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर दिया है। किम जोंग उन पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण को बातचीत की शर्त के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षण न केवल कोरियाई प्रायद्वीप बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

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