बारामती उपचुनाव में कांग्रेस का बड़ा फैसला, उम्मीदवार वापस लेने से सुनेत्रा पवार की राह आसान

बारामती/मुंबई: महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस सीट पर अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगी और पहले घोषित प्रत्याशी का नामांकन वापस ले लिया जाएगा। यह जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने दी है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने बारामती सीट से आकाश मोरे को टिकट दिया था, लेकिन अब पार्टी ने राज्य इकाई को निर्देश दिया है कि उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले। नाम वापसी की अंतिम समय सीमा गुरुवार दोपहर 3 बजे तक निर्धारित है, जिसके भीतर यह प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।

कांग्रेस के इस फैसले से एनसीपी (अजित पवार गुट) की उम्मीदवार सुनेत्रा पवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। उनके निर्विरोध चुने जाने का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो गया है।

राजनीतिक समीकरण और पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र में इस समय बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) की गठबंधन सरकार है। बारामती सीट गठबंधन के तहत एनसीपी के खाते में आई थी। इसी सीट से अजित पवार विधायक थे और उपमुख्यमंत्री का पद संभाल रहे थे। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है।

सुनेत्रा पवार पहले ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुकी हैं और अब वह इस सीट से विधायक बनकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हैं।

23 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे
बारामती के साथ-साथ राहुरी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। दोनों सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और गुरुवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है।

राहुरी सीट पर उपचुनाव बीजेपी नेता शिवाजी कर्डीले के निधन के कारण कराया जा रहा है।

एनसीपी नेताओं की सक्रियता रंग लाई
सूत्रों के अनुसार एनसीपी नेताओं ने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से लगातार संपर्क बनाए रखा और बारामती से उम्मीदवार नहीं उतारने की अपील की। खुद सुनेत्रा पवार ने दो बार उनसे बातचीत की, जबकि रोहित पवार भी उनसे मिलने पहुंचे थे।

इन प्रयासों के बाद कांग्रेस ने उम्मीदवार वापस लेने का निर्णय लिया, जिससे बारामती उपचुनाव का मुकाबला एकतरफा होने की स्थिति बन गई है।

कांग्रेस के इस रणनीतिक फैसले ने बारामती की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब यह उपचुनाव औपचारिकता भर रह जाने की संभावना है, जहां सुनेत्रा पवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

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