मुंबई | आवाज़ प्लस
बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए नागरिकों को सख्त संदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि अब समय आ गया है कि लोग सिविक सेंस अपनाएं और ट्रैफिक नियमों का ईमानदारी से पालन करें।

जस्टिस जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामला एक व्यक्ति की मौत से जुड़ा था, जिसे सड़क पार करते समय बस ने टक्कर मार दी थी।
‘विदेश में नियम मानते हैं, तो यहां क्यों नहीं?’
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय नागरिक विदेशों में ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करते हैं, लेकिन अपने ही देश में लापरवाही बरतते हैं। अदालत ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि नियमों का पालन किसी दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़ों और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे खुद नियमों का पालन करें, ताकि बच्चे उनसे अच्छी आदतें सीख सकें।
ट्रैफिक पुलिस को भी सख्ती के निर्देश
अदालत ने ट्रैफिक पुलिस को भी निर्देश दिए कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने विशेष रूप से टू-व्हीलर चालकों द्वारा नियमों की अनदेखी पर चिंता जताई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला ठाणे में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। वर्ष 2012 में एक व्यक्ति, जो पार्किंसन बीमारी से पीड़ित था और आंशिक रूप से लकवाग्रस्त था, सड़क पार करते समय ठाणे म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट की बस की चपेट में आ गया था। बाद में मार्च 2013 में उसकी मौत हो गई।
मुआवजा बढ़ाकर 15 लाख किया
मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने पहले पीड़ित परिवार को 13 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी।
अदालत ने माना कि हादसे में कुछ हद तक लापरवाही मृतक की भी थी, लेकिन साथ ही बस चालक को भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता थी।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी न केवल कानून के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करती है, बल्कि समाज में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अहमियत को भी सामने लाती है।
