ग्रेटर नोएडा: हाल ही में नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के मामले में प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

कमेटी के अनुसार, श्रमिकों की कुछ मांगें जायज थीं, लेकिन “मिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन” के जरिए माहौल को भड़काने की कोशिश की गई। बताया गया कि गलत सूचना फैलाई गई कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये तय कर दिया है, जबकि इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
बाहरी तत्वों की भूमिका पर संदेह
प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों के प्रदर्शन की आड़ में कुछ बाहरी और अराजक तत्व सक्रिय थे, जिन्होंने हालात को हिंसक बनाने का प्रयास किया। इन तत्वों का मकसद प्रदेश में बन रहे सकारात्मक औद्योगिक माहौल को खराब करना था।
मुख्य सचिव का बयान
मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उद्योग, श्रम विभाग, जिला प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी बनाई गई है। कमेटी ने श्रमिकों और उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत कर स्थिति को समझा और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
ACS MSME आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य के औद्योगिक माहौल को बिगाड़ने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
श्रमिकों ने भी हिंसा से किया इनकार
प्रशासन के साथ बातचीत में श्रमिकों ने अपनी मांगों को जायज बताते हुए वेतन वृद्धि की मांग दोहराई, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा से खुद को अलग बताया।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
