बहरामपुर में फिर त्रिकोणीय जंग, किसके पक्ष में जाएगा समीकरण?

बहरामपुर, मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बहरामपुर सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं।

कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारा है, जिनका इस क्षेत्र में मजबूत जनाधार माना जाता है। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नारू गोपाल मुखर्जी पर भरोसा जताया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने सुब्रत मैत्रा को उम्मीदवार बनाया है।

बदले हुए सियासी समीकरण

बहरामपुर सीट लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत किला रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं बीजेपी भी तेजी से उभरती ताकत बनकर सामने आई है।

इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने की पूरी संभावना है।

  • कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक—खासकर मुस्लिम और पुराने समर्थकों—पर भरोसा कर रही है
  • टीएमसी सत्ता, संगठन और ग्रामीण नेटवर्क के दम पर जीत दोहराने की कोशिश में है
  • बीजेपी शहरी और युवा मतदाताओं के बीच बढ़ती पैठ का फायदा उठाना चाहती है

2021: बीजेपी की जीत

2021 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के सुब्रत मैत्रा ने जीत दर्ज की थी।

  • सुब्रत मैत्रा: 89,340 वोट (45.21%)
  • नारू गोपाल मुखर्जी (टीएमसी): 62,488 वोट (31.62%)
  • कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही

यह नतीजा बहरामपुर की पारंपरिक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत था।

2016: कांग्रेस का दबदबा

2016 में कांग्रेस उम्मीदवार मनोज चक्रवर्ती ने भारी मतों से जीत हासिल की थी।

  • मनोज चक्रवर्ती: 1,27,308 वोट
  • टीएमसी: 35,035 वोट
  • बीजेपी तीसरे स्थान पर

क्या कहती है मौजूदा स्थिति?

इस बार मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है।

  • अधीर रंजन चौधरी की वापसी कांग्रेस के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है
  • टीएमसी संगठनात्मक ताकत के सहारे मुकाबले को संतुलित करने की कोशिश करेगी
  • बीजेपी 2021 की जीत को दोहराने के इरादे से मैदान में है

चुनाव कार्यक्रम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।

बहरामपुर सीट पर इस बार सीधा मुकाबला नहीं बल्कि त्रिकोणीय टक्कर देखने को मिलेगी। नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन पार्टी अपने कोर वोट बैंक को बचाते हुए नए मतदाताओं को जोड़ने में सफल रहती है।

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