आवाज़ प्लस | अंतरराष्ट्रीय समाचार
मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों तक पहुंच गया है। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के प्रमुख बंदरगाहों पर कड़ी नाकाबंदी कर दी है, जिससे ईरान से बाहर जाने वाले तेल और गैस के जहाजों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

अमेरिका के विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि इस कार्रवाई के बाद ईरान अब चीन को “एक बूंद भी तेल” सप्लाई नहीं कर पाएगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद कम से कम तीन ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
इस बीच, चीन की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस ने आगे आकर बीजिंग को तेल और गैस की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है।
वहीं, कूटनीतिक मोर्चे पर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद तेहरान में बुधवार को एक धमाका हुआ, जिसमें कम से कम तीन लोग घायल हो गए। घटना के पीछे के कारणों की जांच जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अगले दौर की वार्ता 16 अप्रैल को होने की संभावना है। पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल रहने के बाद अब अमेरिका ने भारत की ओर उम्मीदें बढ़ाई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर करीब 40 मिनट तक बातचीत की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाए रखने और मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
