Iran–US War: चीन को ईरानी तेल पर अमेरिकी रोक की चेतावनी, वैश्विक बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने चीन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अब वह ईरान से “एक बूंद भी तेल” नहीं ले जा सकेगा। यह बयान अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने आईएमएफ–विश्व बैंक की बैठक के दौरान दिया।

होर्मुज पर सख्ती, चीनी टैंकरों पर निगरानी

अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले चीनी तेल टैंकरों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। बेसेंट ने कहा कि ईरान से तेल लेकर जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा और उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हाल ही में ईरान से निकले कुछ जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर गए हैं, जिससे अमेरिकी दावों पर सवाल भी उठ रहे हैं।

अमेरिका की रणनीति: ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव

अमेरिका का मानना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात पर निर्भर है। ऐसे में तेल सप्लाई रोककर वह ईरान पर आर्थिक दबाव बनाना चाहता है।
साथ ही, अमेरिका चीन और ईरान के बढ़ते सहयोग को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती मान रहा है। हाल ही में अमेरिका ने चीन पर ईरान को रक्षा प्रणाली देने का आरोप भी लगाया था।

चीन के सामने ऊर्जा संकट का खतरा

यदि अमेरिका अपने इरादों में सफल होता है, तो चीन के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट खड़ा हो सकता है। चीन ईरान का बड़ा तेल खरीदार रहा है, और इस सप्लाई में बाधा आने से उसकी ऊर्जा रणनीति प्रभावित हो सकती है।

रूस ने बढ़ाया सहयोग का हाथ

इस बीच रूस ने चीन को भरोसा दिलाया है कि वह उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। रूस पहले से ही चीन और ईरान दोनों का करीबी सहयोगी है। ऐसे में यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति को और जटिल बना सकता है।

वैश्विक तेल बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

  • चीन वैकल्पिक स्रोतों जैसे रूस और सऊदी अरब की ओर रुख कर सकता है
  • सप्लाई चेन में बदलाव से कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव
  • वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है

अमेरिका की यह सख्त नीति न सिर्फ ईरान और चीन के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह तनाव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या और गहराता है।

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