आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल को लेकर आज संसद में लगभग 18 घंटे की लंबी और अहम बहस होने जा रही है। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताते हुए विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की है।

रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक भारत की संसद के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जिसके माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी राजनीतिक दल इस बिल का समर्थन करेंगे और लंबे समय से लंबित इस मुद्दे को निर्णायक रूप देंगे।
“परिसीमन के नाम पर न फैलाएं भ्रम”
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को रोकने के लिए परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा उठाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अफवाहें फैलाकर खासकर दक्षिण भारत के लोगों को गुमराह करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अपील की कि इस बिल को किसी अन्य राजनीतिक मुद्दे से जोड़कर इसके उद्देश्य को कमजोर न किया जाए।
स्टालिन पर राजनीतिकरण का आरोप
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin पर टिप्पणी करते हुए रिजिजू ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उनके अनुसार, कुछ लोग मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय को विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का बहाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
राज्यों को दिया भरोसा
रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उचित प्रतिनिधित्व और अवसर मिलेगा।
उन्होंने दोहराया कि यह विधेयक महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए।
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