आवाज़ प्लस | अहमदाबाद
अहमदाबाद के साबरमती नदी किनारे स्थित आसाराम से जुड़े आश्रम को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। गुजरात हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आश्रम की अपील खारिज करते हुए सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखा है, जिससे आश्रम को हटाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आश्रम ने सरकारी जमीन आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया है और साबरमती नदी की भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नदी की जमीन का किसी भी परिस्थिति में नियमितीकरण (Regularization) संभव नहीं है।
स्टे की मांग भी ठुकराई
आश्रम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी के लिए 4 हफ्ते के स्टे की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने शर्त रखी थी कि यदि आश्रम जमीन खाली करने का हलफनामा देता है तभी राहत पर विचार होगा। इस शर्त को देखते हुए फिलहाल आश्रम को कोई तत्काल राहत नहीं मिली है।
प्रशासन की तैयारी तेज
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 202 के तहत आश्रम को नया नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद प्रशासन जमीन का कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगा। माना जा रहा है कि जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई भी हो सकती है।
45 साल पुराना विवाद
गौरतलब है कि यह आश्रम पिछले करीब 45 वर्षों से साबरमती नदी के किनारे मौजूद है। जिला कलेक्टर द्वारा आवंटन शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद से ही यह विवाद अदालत में चल रहा था।
आगे क्या?
अब आश्रम के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है। हालांकि, हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए प्रशासनिक कार्रवाई जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
