आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट जमानत बढ़ाने और अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया कि वे असम की अदालत में ही राहत के लिए याचिका दायर करें।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खेड़ा की ओर से दाखिल किए गए दस्तावेजों को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अदालत में फर्जी या गलत दस्तावेज़ पेश करना गंभीर मामला है।
कोर्ट में क्या-क्या हुआ? (10 अहम बिंदु)
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का कड़ा विरोध किया।
- खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्रांजिट बेल बढ़ाने की मांग की।
- कोर्ट ने सवाल उठाया कि याचिका तेलंगाना में क्यों दाखिल की गई, असम में क्यों नहीं।
- सिंघवी ने कहा कि उन्हें असम में याचिका दाखिल करने के लिए समय चाहिए।
- कोर्ट ने गलत दस्तावेज दाखिल करने पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे गंभीर त्रुटि बताया।
- जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि जाली या मनगढ़ंत दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा सकते।
- सिंघवी ने इसे “छोटी गलती” बताया, जिस पर कोर्ट ने असहमति जताई।
- अदालत ने कहा कि पहले से दिया गया आदेश मौजूद था, फिर देरी क्यों हुई।
- कोर्ट ने साफ कहा कि असम में याचिका दायर करें, वहीं सुनवाई होगी।
- साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि गुवाहाटी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होगा।
लगातार दूसरा झटका
- सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी से कोई राहत नहीं मिली
- ट्रांजिट जमानत बढ़ाने की मांग खारिज
- तत्काल असम जाकर अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने का निर्देश
- अदालत ने कहा—मामले का फैसला तथ्यों और गुण-दोष के आधार पर होगा
अदालत का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सही दस्तावेजों का महत्व सर्वोपरि है। किसी भी तरह की लापरवाही या गलत जानकारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
आवाज़ प्लस आपको इस मामले से जुड़े हर अपडेट से लगातार अवगत कराता रहेगा।
