महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज, सरकार-विपक्ष आमने-सामने

आवाज़ प्लस | विशेष रिपोर्ट

नई दिल्लीः महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन प्रक्रिया से संबंधित विधेयकों के पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “महिलाओं का हक छीनकर जश्न मनाना घोर पाप है।” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर गंभीर नहीं है और राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है।

वहीं, बीजेपी संगठन भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने राज्यों में विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ “निंदा प्रस्ताव” पारित करने का सुझाव दिया।

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को लागू करने की कोशिश की जा रही है, जिसे विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार 2023 के महिला आरक्षण कानून को बिना शर्त लागू करती है, तो विपक्ष उसका समर्थन करने को तैयार है।

इस बीच, संसद सत्र के समापन के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जानकारी दी कि 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र में कुल 31 बैठकें हुईं और कार्यवाही 151 घंटे 42 मिनट चली, जिसमें उत्पादकता 93 प्रतिशत रही।

महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर सहमति के बजाय टकराव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

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