महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा हमला

नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में पास न हो पाने के बाद देश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने “बहुत बड़ी गलती” की है, जिसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने वाले इस महत्वपूर्ण विधेयक को गिराकर विपक्ष ने देश की नारी शक्ति को निराश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं विपक्ष को कभी माफ नहीं करेंगी और इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में दिखेगा।

लोकसभा में नहीं मिला जरूरी बहुमत

महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर लोकसभा में लंबी और गरमागरम बहस के बाद मतदान हुआ। हालांकि, सरकार इस बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में असफल रही।

  • बिल के पक्ष में: 298 वोट
  • बिल के विरोध में: 230 वोट

इस तरह यह विधेयक संसद में पास नहीं हो सका, जिससे सरकार को बड़ा झटका लगा।

पीएम मोदी की अपील: अंतरात्मा की आवाज सुनें

वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में भावुक अपील करते हुए सभी सांसदों से कहा था कि वे “नारी शक्ति” का सम्मान करते हुए अपने निर्णय लें। उन्होंने कहा:

“देश की करोड़ों महिलाओं की नजर हम पर है। कृपया ऐसा कुछ न करें जिससे उनकी भावनाएं आहत हों। अपने घर की मां, बहन, बेटी और पत्नी को याद करके अंतरात्मा की आवाज सुनें।”

राजनीतिक संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी

कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि महिला आरक्षण बिल से जुड़े संदेश को देश के हर कोने तक पहुंचाया जाए। उनका मानना है कि इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को जनता के सामने लाना जरूरी है, खासकर महिलाओं के बीच।

आगे क्या?

महिला आरक्षण बिल के फेल होने के बाद अब यह मुद्दा आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन सकता है। सत्तापक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रहा है, जबकि विपक्ष अपने रुख को सही ठहराने में जुटा है।

महिला आरक्षण बिल भले ही संसद में पास नहीं हो पाया, लेकिन इसने देश की राजनीति में नई बहस और टकराव को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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