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इस्लामाबाद/तेहरान:
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का तीन दिवसीय ईरान दौरा बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों के तहत हुआ यह दौरा कूटनीतिक स्तर पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका। ईरान ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगा।

सूत्रों के मुताबिक, तेहरान में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान ईरान ने साफ कहा कि वह अपने एनरिच्ड यूरेनियम को किसी भी देश को ट्रांसफर नहीं करेगा। यह रुख अमेरिका की उस रणनीति के खिलाफ माना जा रहा है, जिसके तहत वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना चाहता है।
दौरे के दौरान जनरल मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति बहाली पर चर्चा की। हालांकि इन बैठकों के बावजूद किसी भी तरह की सहमति बनती नजर नहीं आई।
यह दौरा ऐसे समय पर हुआ जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बाद सीमित युद्धविराम लागू हुआ है। पाकिस्तान ने इस अवसर को मध्यस्थता के तौर पर भुनाने की कोशिश की, लेकिन ईरान के सख्त रुख के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस असफलता से पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति को झटका लग सकता है, वहीं अमेरिका को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
तीन दिन की गहन वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान के सेना प्रमुख खाली हाथ लौटे हैं। ईरान का स्पष्ट संदेश है—परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं।
