आवाज़ प्लस | नोएडा/लखनऊ
उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा के मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को पुलिस ने तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। करीब 2400 किलोमीटर दूर छिपे इस आरोपी को पकड़ने के लिए एसटीएफ और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम कई दिनों से लगातार दबिश दे रही थी।

गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आदित्य आनंद हिंसा के बाद अपना हुलिया बदलकर फरार हो गया था। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए दाढ़ी और बाल कटवा लिए थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते आखिरकार वह गिरफ्त में आ गया।
साजिश का नेटवर्क और भड़काऊ रणनीति
जांच में सामने आया है कि आदित्य आनंद ने अपने साथियों—रूपेश राय, मनीषा चौहान, श्रृष्टि और आकृति—के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से हिंसा की साजिश रची थी। इससे पहले ये सभी मानेसर में भी अशांति फैलाने की गतिविधियों में शामिल रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि “मेलाफाइड इंटेंशन” के तहत संगठित रूप से की गई कार्रवाई थी। आदित्य और रूपेश पिछले कई वर्षों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय थे और जहां भी कोई आंदोलन होता, वहां उनकी मौजूदगी पाई जाती थी।
सोशल मीडिया और QR कोड से रची गई पूरी योजना
घटना की टाइमलाइन के अनुसार, 31 मार्च और 1 अप्रैल को दोनों आरोपियों की गतिविधियां नोएडा में देखी गईं। इसके बाद 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए, जिनके माध्यम से मजदूरों को जोड़ा गया।
10 अप्रैल को मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू किया, जबकि 11 अप्रैल को उन्हें सड़क जाम करने के लिए उकसाया गया। जब स्थिति को शांत करने का प्रयास हुआ, तब आदित्य और उसके साथियों ने भड़काऊ भाषण देकर माहौल को फिर से गरमा दिया।
13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के सामने मजदूरों को इकट्ठा होने के लिए उकसाया गया। इसी दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर फर्जी पोस्ट्स वायरल की गईं, जिन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच देखा गया। इन भ्रामक सूचनाओं ने माहौल को और भड़का दिया और हिंसा भड़क उठी।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
पुलिस अब आदित्य आनंद से पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि इस पूरे नेटवर्क और इसके पीछे के संभावित फंडिंग व कनेक्शन को लेकर और बड़े खुलासे हो सकते हैं। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
नोएडा पुलिस का कहना है कि इस तरह की साजिशों को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
