लखनऊ/नई दिल्ली | आवाज़ प्लस
देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 92 भारत के हैं। वहीं AQI.in की रिपोर्ट बताती है कि टॉप 20 सबसे गर्म स्थानों में से 19 भारत में स्थित हैं, जहां अप्रैल में ही तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी चेतावनी दी है कि इस साल मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी।
क्यों बढ़ रही है गर्मी?
विशेषज्ञों के अनुसार इस साल भीषण गर्मी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- हीट डोम प्रभाव:
उच्च दबाव के कारण गर्म हवा जमीन के पास ही फंस रही है, जिससे तापमान लगातार बढ़ रहा है। - कमजोर पश्चिमी विक्षोभ:
उत्तर भारत में ठंडी हवाओं की कमी के कारण तापमान में गिरावट नहीं हो पा रही। - जलवायु परिवर्तन:
ग्लोबल वार्मिंग के कारण हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ी हैं।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी चेतावनी दी है कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण भविष्य में गर्मी और अधिक खतरनाक हो सकती है।
अल-नीनो का भी असर
रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 में वैश्विक तापमान सामान्य से लगभग 1.44°C अधिक दर्ज किया गया है।
NOAA और ECMWF के अनुसार जून से अक्टूबर के बीच अल-नीनो के प्रभाव के बढ़ने की संभावना है, जिससे गर्मी और तेज हो सकती है।
शहर बन रहे हीट ट्रैप
- कंक्रीट की इमारतें और सड़कें दिन में गर्मी सोखती हैं और रात में छोड़ती हैं
- पेड़ों की कमी और घटता भूजल स्तर नमी कम कर रहा है
- “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव से शहरों का तापमान ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक हो गया है
दिन ही नहीं, रातें भी खतरनाक
अब केवल दिन ही नहीं, रातें भी राहत नहीं दे रही हैं।
जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4°C अधिक होता है, तो उसे “सीवियर वार्म नाइट” कहा जाता है।
इसका असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है:
- डिहाइड्रेशन
- नींद में कमी
- हाई ब्लड प्रेशर
- हीट स्ट्रोक का खतरा
बढ़ता खतरा और नुकसान
- 1998–2017 के बीच दुनिया में 1.66 लाख लोगों की मौत हीटवेव से
- भारत में 2023 में 48,000 हीटस्ट्रोक केस और 159 मौतें
- 2030 तक भारत में 5.8% काम के घंटे कम होने का अनुमान
Council on Energy, Environment and Water की रिपोर्ट के अनुसार देश के 50% से अधिक जिले हाई या वेरी हाई हीट रिस्क जोन में आ चुके हैं।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 में गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
बढ़ती गर्मी न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था, उत्पादकता और जीवनशैली पर भी गहरा असर डालेगी।
भारत में बढ़ती गर्मी अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर जलवायु संकट का संकेत है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
