क्रिकेट के रोमांचक फॉर्मेट में जब मैच टाई हो जाता है, तो नतीजा निकालने के लिए सुपर ओवर का सहारा लिया जाता है। हाल ही में Indian Premier League 2026 में Lucknow Super Giants और Kolkata Knight Riders के बीच खेले गए मुकाबले में भी सुपर ओवर से फैसला हुआ। इस दौरान Sunil Narine ने विकेट लिए और Rinku Singh ने चौका लगाया—लेकिन ये प्रदर्शन उनके आधिकारिक करियर रिकॉर्ड में नहीं जुड़ा।

आइए समझते हैं इसके पीछे की तीन बड़ी वजहें:
1. सुपर ओवर सिर्फ रिजल्ट तय करने का माध्यम
सुपर ओवर मूल मैच का हिस्सा नहीं माना जाता। टी20 (20 ओवर) या वनडे (50 ओवर) में मैच खत्म हो जाता है। अगर स्कोर बराबर हो, तभी सुपर ओवर कराया जाता है—सिर्फ विजेता तय करने के लिए। इसलिए इसमें बने रन और विकेट को आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता।
2. सभी खिलाड़ियों को बराबर मौका नहीं मिलता
सुपर ओवर में केवल:
- 1 गेंदबाज
- 2–3 बल्लेबाज
को ही खेलने का मौका मिलता है। बाकी खिलाड़ी इसमें भाग नहीं लेते। अगर इन आंकड़ों को रिकॉर्ड में जोड़ा जाए, तो यह अन्य खिलाड़ियों के साथ असमानता पैदा करेगा। क्रिकेट में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह नियम लागू है।
3. ओवर लिमिट नियम का संतुलन बिगड़ जाएगा
क्रिकेट के नियमों के अनुसार:
- टी20 में एक गेंदबाज अधिकतम 4 ओवर
- वनडे में अधिकतम 10 ओवर
ही डाल सकता है। यदि सुपर ओवर के आंकड़े जोड़ दिए जाएं, तो गेंदबाज तय सीमा से अधिक ओवर डालते हुए दिखेंगे (जैसे टी20 में 5 ओवर), जिससे नियमों का संतुलन बिगड़ जाएगा।
सुपर ओवर भले ही मैच का सबसे रोमांचक हिस्सा हो, लेकिन इसका उद्देश्य सिर्फ जीत-हार तय करना है, न कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना। इसलिए इसमें बने रन और लिए गए विकेट खिलाड़ियों के आधिकारिक करियर आंकड़ों में शामिल नहीं किए जाते।
(Awaz Plus के लिए विशेष रिपोर्ट)
