‘महाभारत’ की रुक्मणी बनीं चन्ना रुपारेल: ग्लैमर से दूरी, आध्यात्म की राह चुनी

लखनऊ | आवाज प्लस

80 के दशक में जब महाभारत और रामायण जैसे धारावाहिक प्रसारित होते थे, तब सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। इन शोज़ के कलाकार दर्शकों के लिए सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि श्रद्धा के प्रतीक बन जाते थे। इन्हीं चेहरों में एक नाम था—रुक्मणी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री चन्ना रुपारेल, जिन्होंने अपनी सादगी और नीली आंखों से खास पहचान बनाई।

शुरुआती करियर और ‘महाभारत’ से पहचान

चन्ना रुपारेल ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और 1987 में टीवी शो चुनौती के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा। जल्द ही उन्हें बी.आर. चोपड़ा के प्रतिष्ठित धारावाहिक महाभारत में रुक्मणी का रोल मिला।

इस किरदार को उन्होंने इतनी गरिमा और सहजता से निभाया कि दर्शकों ने उन्हें वास्तविक जीवन में भी उसी सम्मान से देखना शुरू कर दिया। हालांकि, लोकप्रियता के चरम पर पहुंचने के बावजूद, वह अचानक इंडस्ट्री से गायब हो गईं।

‘स्वाभिमान’ से वापसी, फिर अचानक दूरी

लंबे अंतराल के बाद 1994 में चन्ना ने स्वाभिमान के जरिए वापसी की। इसमें उनके ‘मेधा हेगड़े’ के किरदार को काफी सराहा गया। उनकी खूबसूरती, खासकर नीली आंखों का आकर्षण, फिर चर्चा में आया।

ऐसा लग रहा था कि उनका करियर नई ऊंचाइयों पर जाएगा, लेकिन एक बार फिर उन्होंने मनोरंजन जगत से दूरी बना ली। उनके इस फैसले ने फैंस को हैरान कर दिया।

ग्लैमर से दूरी, आध्यात्म की ओर रुझान

आज करीब 55 वर्ष की हो चुकीं चन्ना रुपारेल पूरी तरह से अभिनय से दूर हैं। उनका झुकाव आध्यात्म की ओर रहा है और वह भगवान शिव की भक्ति में लीन रहती हैं। वे सादगीपूर्ण जीवन जी रही हैं और सोशल मीडिया के जरिए सीमित रूप से प्रशंसकों से जुड़ी रहती हैं।

एक मिसाल: शोहरत से ज्यादा शांति की तलाश

चन्ना रुपारेल की कहानी उस सच्चाई को सामने लाती है, जहां अपार सफलता और पहचान मिलने के बाद भी कई कलाकार आंतरिक शांति की तलाश में ग्लैमर छोड़ देते हैं।

आज भी जब महाभारत की चर्चा होती है, तो नीली आंखों वाली रुक्मणी की छवि दर्शकों के मन में ताजा हो जाती है—एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने कम समय में गहरी छाप छोड़ी, और फिर खामोशी से अपनी अलग दुनिया बसा ली।

(आवाज प्लस के लिए विशेष रिपोर्ट)

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