पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच IPS अजय पाल शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट में PIL, निष्पक्षता पर उठे सवाल

लखनऊ/कोलकाता:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक बड़ा संवैधानिक मुद्दा सामने आया है। यूपी कैडर के चर्चित IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के खिलाफ Supreme Court of India में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में उन्हें तत्काल प्रभाव से चुनावी पुलिस ऑब्जर्वर पद से हटाने की मांग की गई है।

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में यदि चुनाव प्रक्रिया में तैनात कोई अधिकारी पक्षपातपूर्ण आचरण करता है, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।

अजय पाल शर्मा पर क्या आरोप?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि Ajay Pal Sharma ने Election Commission of India के ऑब्जर्वर के रूप में अपेक्षित निष्पक्षता का पालन नहीं किया।
दावा किया गया है कि दक्षिण 24 परगना जिले में तैनाती के दौरान उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को डराने-धमकाने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।

चुनावी माहौल पर असर का दावा
याचिका में कहा गया है कि उनकी मौजूदगी से West Bengal में चुनावी माहौल प्रभावित हो रहा है। इससे “लेवल प्लेइंग फील्ड” यानी सभी दलों के लिए समान अवसर की अवधारणा कमजोर हो रही है, जो लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।

कानूनी आधार क्या बताया गया?
याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act, 1951 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित करने के लिए होती है। यदि वही अधिकारी पक्षपातपूर्ण व्यवहार करे, तो यह पूरे चुनावी सिस्टम में जनता के भरोसे को चोट पहुंचाता है।

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि:

  • मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए
  • अजय पाल शर्मा को ऑब्जर्वर पद से हटाया जाए
  • पश्चिम बंगाल चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं

अब आगे क्या?
मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट का रुख और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में चुनावी परिदृश्य पर बड़ा असर डाल सकती है।

(Awaz Plus के लिए विशेष रिपोर्ट)

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