कोलकाता | आवाज़ प्लस
पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव के बीच सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने केंद्रीय बलों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

🔴 केंद्रीय बलों पर आरोप, निष्पक्षता पर सवाल
ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव में तैनात कई पर्यवेक्षक और केंद्रीय बल निष्पक्ष नहीं हैं और वे भाजपा के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे माहौल में निष्पक्ष मतदान संभव है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस के झंडे हटाए गए और बाहरी लोग क्षेत्र में दखल दे रहे हैं।
📍 भवानीपुर में सुबह-सुबह दौरा, बदला अंदाज़
मुख्यमंत्री ने सुबह 8 बजे से पहले ही भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के कई मतदान केंद्रों का दौरा किया। चेतला और चक्रबेड़िया इलाकों में निरीक्षण के दौरान उन्होंने मतदान केंद्र के बाहर बैठकर मीडिया से बातचीत की और अनियमितताओं की शिकायत की।
यह पहली बार देखने को मिला जब ममता बनर्जी इतनी सुबह से सक्रिय होकर मतदान प्रक्रिया पर नजर रखती दिखीं।
⚠️ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वार्ड 70 के पार्षद को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है और तृणमूल के कई कार्यकर्ताओं को जबरन उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी रात वे और Abhishek Banerjee हालात पर नजर बनाए हुए थे।
🏛️ चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि राज्य के बाहर से आए लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल जनता के गुस्से से घबराकर भ्रम फैला रहा है।
📊 राजनीतिक तनाव चरम पर
तृणमूल कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि पार्टी 2021 से बेहतर प्रदर्शन करेगी और सत्ता में वापसी करेगी। वहीं विपक्ष इन आरोपों को राजनीतिक रणनीति बता रहा है।
इस बार बंगाल चुनाव में केवल वोटिंग नहीं, बल्कि नैरेटिव की भी जंग तेज है। ममता बनर्जी का आक्रामक रुख और लगातार निगरानी यह संकेत देता है कि मुकाबला बेहद कांटे का है। आने वाले नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
