लखनऊ। मई महीने में पड़ने वाली ज्येष्ठ अमावस्या इस वर्ष 16 मई 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पितरों के निमित्त किए गए कार्य अत्यंत पुण्यदायी माने जाते हैं। खास बात यह है कि इस बार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी मनाया जाएगा, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।

📅 अमावस्या तिथि और समय
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का प्रारंभ 16 मई की सुबह 05:11 बजे से होगा और इसका समापन 17 मई की रात 01:30 बजे पर होगा। उदया तिथि के अनुसार अमावस्या का व्रत और पूजन 16 मई को ही किया जाएगा।
⏰ प्रमुख शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:07 AM – 04:48 AM
- प्रातः संध्या: 04:27 AM – 05:30 AM
- अभिजित मुहूर्त: 11:50 AM – 12:45 PM
- विजय मुहूर्त: 02:34 PM – 03:28 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 07:04 PM – 07:25 PM
- सायं संध्या: 07:05 PM – 08:08 PM
- अमृत काल: 01:15 PM – 02:40 PM
🙏 क्या करें ज्येष्ठ अमावस्या पर?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कार्यों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- सुबह पवित्र नदी या घर में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें
- पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करें
- बहते जल में तिल प्रवाहित करें
- शनि देव की पूजा करें, विशेषकर शनिदेव को तेल अर्पित करें
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें
🎁 क्या दान करना शुभ माना गया है?
इस दिन जल से भरा घड़ा, काले तिल, फल, वस्त्र, छाता और अन्न का दान विशेष फलदायी माना जाता है।
🌿 वट सावित्री व्रत का महत्व
उत्तर भारत में विवाहित महिलाएं इस दिन वट सावित्री व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
ज्येष्ठ अमावस्या 2026 केवल एक तिथि नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जिसमें शनि उपासना, पितृ तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। ऐसे में श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से पूजा कर अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति की कामना करते हैं।
