नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम TARA का सफल परीक्षण कर लिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने 7 मई को ओडिशा तट पर Tactical Advanced Range Augmentation यानी TARA का पहला सफल फ्लाइट टेस्ट किया। इस उपलब्धि के साथ भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली स्वदेशी ग्लाइड हथियार तकनीक मौजूद है।

TARA को खास तौर पर अनिर्देशित बमों को अत्याधुनिक गाइडेड वेपन में बदलने के लिए तैयार किया गया है। यह सिस्टम बमों की मारक क्षमता को करीब 150 से 180 किलोमीटर तक बढ़ा देता है। यानी अब भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस के दायरे से बाहर रहते हुए भी बेहद सटीक हमला कर सकेंगे।
3 मीटर की सटीकता से होगा टारगेट ध्वस्त
TARA में EO/IR गाइडेंस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से यह लक्ष्य को बेहद सटीकता से निशाना बनाता है। दावा है कि यह सिस्टम टारगेट के सिर्फ 3 मीटर के दायरे में वार करने में सक्षम है। इससे दुश्मन के बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम और रणनीतिक ठिकानों को कम लागत में तबाह किया जा सकेगा।
हैदराबाद के RCI ने निभाई बड़ी भूमिका
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस स्वदेशी सिस्टम को हैदराबाद स्थित Research Centre Imarat (RCI) ने अन्य DRDO लैब्स के साथ मिलकर विकसित किया है। इसका मकसद कम लागत वाले हथियारों की क्षमता बढ़ाना और भारतीय सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करना है।
राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की बड़ी जीत
रक्षामंत्री Rajnath Singh ने सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं DRDO प्रमुख Samir V. Kamat ने भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम की सराहना की।
अब माना जा रहा है कि TARA आने वाले समय में भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला है और दुश्मनों के लिए बड़ा खतरा साबित होगा।
