आवाज़ प्लस | कौशांबी | विशेष रिपोर्ट
कौशांबी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराती हुई नजर आ रही है। जिले के गांवों, कस्बों, बाजारों, चौराहों और गलियों में हजारों की संख्या में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कई स्थानों पर बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के बड़े-बड़े अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं, जिनका संचालन कथित स्वास्थ्य माफियाओं के हाथों में है।
स्थिति यह हो गई है कि अब अस्पताल संचालन में भी माफियागिरी हावी हो चुकी है। एक-एक कथित डॉक्टर के नाम पर चार-चार अस्पताल चल रहे हैं। सवाल यह उठता है कि वह डॉक्टर आखिर एक साथ कहां-कहां मरीज देखता है और किस अस्पताल में इलाज करता है—इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
इलाज या लूट? ऑपरेशन के नाम पर वसूली
जिले में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां बिना डिग्री के कथित डॉक्टर मरीजों का ऑपरेशन कर रहे हैं। मरीज के पेट को चीरकर इलाज के नाम पर उसके परिजनों से लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं। यह वसूली इलाज की है या फिर मरीज और उसके परिवार की खुली लूट—यह सवाल अब आम जनता पूछ रही है।
जिनके पास मेडिकल की कोई वैध डिग्री नहीं है, वे कैसे ऑपरेशन कर सकते हैं? और यदि कर रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग आखिर किस बात की निगरानी कर रहा है? सड़क पर लूट करने वाले अपराधी और बिना डिग्री मरीज का पेट चीरकर धन वसूलने वाले कथित डॉक्टरों में क्या फर्क रह गया है—यह प्रश्न स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
इलाज नहीं, भारी बिल और रेफर की परंपरा
ऐसे कथित अस्पतालों में मरीजों का न तो सही इलाज होता है और न ही उनका स्वास्थ्य सुधरता है। इलाज के नाम पर मरीजों को लंबे-चौड़े पर्चे थमा दिए जाते हैं और लाखों रुपये की वसूली की जाती है। जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ जाती है, तो उसे रेफर कर दिया जाता है, और कई मामलों में मरीज की मौत हो जाती है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इन अस्पतालों में मरीजों के इलाज का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड तक नहीं रखा जाता। न यह दर्ज होता है कि मरीज को कब भर्ती किया गया, कौन-सी दवा दी गई, कब रेफर किया गया या फिर कब उसकी मौत हुई। यह सब स्वास्थ्य विभाग के नियमों की खुली अवहेलना है।
सराय अकिल का संदिग्ध अस्पताल चर्चा में
इसी तरह का एक मामला सराय अकिल कस्बे के बेनीराम कटरा इलाके से सामने आया है, जहां एक अस्पताल का संचालन कथित डॉक्टर सिद्दीकी द्वारा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिद्दीकी के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है। बताया जाता है कि वह कभी किसी दूसरे अस्पताल में वार्ड बॉय के रूप में काम करता था, लेकिन कुछ समय बाद उसने सराय अकिल में अपना अस्पताल खोल लिया।
आरोप है कि इस अस्पताल में माफियाओं की तर्ज पर मरीजों से भारी वसूली की गई और इसी के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित की गई। यह अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मानकों पर खरा नहीं उतरता, इसके बावजूद सराय अकिल की मुख्य सड़क पर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर धड़ल्ले से मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कभी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस अस्पताल के अभिलेखों की जांच की? क्या अस्पताल के दस्तावेज, डॉक्टर की डिग्री और रजिस्ट्रेशन की सत्यता परखी गई? यदि नहीं, तो यह स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही मानी जाएगी।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सीएमओ कार्यालय से जुड़े कुछ सरकारी डॉक्टर इस अस्पताल के साझेदार हो सकते हैं। जबकि इन डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर यह दावा किया है कि वे निजी प्रैक्टिस नहीं करते। यदि इसके बावजूद सरकारी डॉक्टर इस अस्पताल का संचालन कर रहे हैं, तो यह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है और उच्चस्तरीय जांच की मांग करता है।
जांच होगी या मेहरबानी जारी रहेगी?
आज भी कथित डॉक्टर सिद्दीकी खुलेआम डॉक्टर के चेंबर में बैठकर पूरे दिन मरीजों का इलाज करता देखा जा सकता है। उसकी डिग्री क्या है, योग्यता क्या है—इस पर न तो कोई जांच हो रही है और न ही कोई कार्रवाई।
अब सवाल यह है कि क्या सीएमओ और स्वास्थ्य विभाग ऐसे कथित डॉक्टरों के गुनाहों को माफ करते रहेंगे? या फिर बिना डिग्री चल रहे अवैध अस्पतालों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी?
कौशांबी की जनता जवाब चाहती है, क्योंकि यहां सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जान का है।
