दिल्ली के जनकपुरी इलाके में 25 वर्षीय कमल ध्यानी की दर्दनाक मौत के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। सड़क पर दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए खुले गड्ढे में गिरने से हुई इस मौत को लेकर परिजनों के आरोपों के बाद पुलिस ने आखिरकार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (IPC 304A) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
परिवार का आरोप है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है—जहां न समय पर पुलिस ने गंभीरता दिखाई और न ही निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए।
कैसे हुई कमल की मौत?
मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल निवासी कमल ध्यानी अपने परिवार के साथ दिल्ली के कैलाशपुरी (पालम) इलाके में रह रहा था। वह एचडीएफसी कॉल सेंटर में काम करता था।
शुक्रवार देर रात वह रोहिणी स्थित ऑफिस से घर लौट रहा था। रात करीब 11:53 बजे उसने अपने जुड़वां भाई करण को फोन कर बताया कि वह जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के पास पहुंच गया है और 10–15 मिनट में घर आ जाएगा। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया।
जब वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों ने जनकपुरी थाने में गुमशुदगी की सूचना दी। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उस समय मामले को गंभीरता से नहीं लिया और सिर्फ आसपास तलाश करवाकर उन्हें टहलाया गया।
सुबह मिला शव, साथ में बाइक भी गड्ढे में
अगली सुबह करीब 8:03 बजे पुलिस को सूचना मिली कि आंध्र स्कूल के पास सड़क किनारे करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में एक युवक गिरा हुआ है।
दमकल विभाग और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवक को बाहर निकाला और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में उसकी पहचान कमल ध्यानी के रूप में हुई।
उसी गड्ढे में उसकी अपाचे बाइक भी पड़ी मिली, जिससे साफ हो गया कि वह चलते समय सीधे खुले गड्ढे में जा गिरा था।
सुरक्षा इंतजाम नदारद, यही बनी मौत की वजह
जांच में सामने आया कि यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा जोगिंदर सिंह मार्ग से C2B लालबत्ती की ओर जाने वाले रास्ते पर खोदा गया था।
स्थानीय लोगों और परिवार का आरोप है कि—
- गड्ढे के आसपास कोई मजबूत बैरिकेडिंग नहीं थी,
- न ही कोई रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड या लाइट लगाई गई थी,
- रात के अंधेरे में यह गड्ढा साफ दिखाई ही नहीं देता था।
यही लापरवाही कमल की जान ले गई।
FIR दर्ज, इंजीनियर सस्पेंड
जनदबाव और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद अब जनकपुरी थाने में ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
दिल्ली सरकार ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए जल बोर्ड के तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच प्राथमिकता पर चल रही है और जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों का दर्द: “रात को खोजा, सुबह लाश मिली”
परिवार का कहना है कि अगर रात में ही पुलिस और प्रशासन ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद कमल की जान बच सकती थी। उनका आरोप है कि FIR भी बाद में “खानापूर्ति” के तौर पर दर्ज की गई।
अब परिवार न्याय की मांग कर रहा है और दोषियों की गिरफ्तारी चाहता है।
निष्कर्ष
कमल ध्यानी की मौत ने एक बार फिर राजधानी की बदहाल सिविक व्यवस्था और सरकारी लापरवाही को उजागर कर दिया है। खुले गड्ढे, बिना सुरक्षा इंतजाम और ढीली निगरानी—ये सब मिलकर आम नागरिक की जान पर भारी पड़ रहे हैं।
अब देखना होगा कि यह मामला सिर्फ निलंबन और एफआईआर तक सीमित रहता है या वास्तव में जिम्मेदार लोगों को सजा मिलती है।
