📍 मुंबई | आवाज़ प्लस न्यूज़
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्यता को लेकर बड़ा फैसला लिया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनायक ने घोषणा की है कि गैर-मराठी चालकों को अब मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया गया है।

सरकार के मुताबिक, 1 मई से राज्यभर में वेरिफिकेशन अभियान शुरू होगा, जिसमें रिक्शा चालकों के दस्तावेज़ और लाइसेंस की जांच की जाएगी। यदि किसी भी तरह की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
⏳ 1 मई से 15 अगस्त तक का समय
सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल भाषा को लेकर थोड़ी राहत दी गई है। इस दौरान RTO और अन्य संस्थानों के माध्यम से चालकों को मराठी सिखाई जाएगी।
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि 15 अगस्त के बाद इस मोहलत को बढ़ाया जाएगा या नहीं, इस पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
⚠️ जरा सी गड़बड़ी पर होगी कार्रवाई
भले ही भाषा सीखने के लिए समय दिया गया हो, लेकिन वेरिफिकेशन प्रक्रिया में कोई ढील नहीं होगी।
1 मई से शुरू होने वाले अभियान में दस्तावेज़ों की जांच के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
🗣️ संजय राउत का बयान
इस मुद्दे पर संजय राउत ने सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा:
“दूसरे राज्यों में भी स्थानीय भाषा अनिवार्य है—पश्चिम बंगाल में बंगाली, गुजरात में गुजराती, कर्नाटक में कन्नड़, पंजाब में पंजाबी। ऐसे में महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्य करने में क्या दिक्कत है?”
उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला ड्राइवरों के हित में है, क्योंकि स्थानीय भाषा जानने से उन्हें काम में आसानी होगी।
महाराष्ट्र सरकार का यह कदम जहां स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की दिशा में देखा जा रहा है, वहीं गैर-मराठी चालकों को भी समय और प्रशिक्षण देकर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 15 अगस्त के बाद सरकार क्या रुख अपनाती है।
📢 आवाज़ प्लस के साथ बने रहें, हर बड़ी खबर सबसे पहले!
