जब आम लोगों को यह लग रहा है कि खाने-पीने की चीजें सस्ती हो रही हैं और महंगाई काबू में है, उसी वक्त भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगले वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का अनुमान बढ़ाकर सबको चौंका दिया है। सवाल यही है—जब सब्ज़ी-दाल के दाम नहीं बढ़ रहे, तो RBI को चिंता किस बात की है?
इसका जवाब छिपा है सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों में।
📊 RBI ने क्या बदला अपने अनुमान में?
आरबीआई ने 2026–27 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई दर 4.0% और दूसरी तिमाही के लिए 4.2% रहने का अनुमान लगाया है। इससे पहले दिसंबर में यह अनुमान इससे कम था।
गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, महंगाई अनुमान में यह मामूली बढ़ोतरी मुख्य रूप से कीमती धातुओं (Gold–Silver) की कीमतों में तेजी के कारण की गई है।
उन्होंने साफ कहा—
“महंगाई अनुमान को ऊपर करने की सबसे बड़ी वजह सोना-चांदी है, जिनका कुल योगदान करीब 0.60% से 0.70% तक पहुंच गया है।”
🪙 सोना-चांदी कैसे बढ़ाते हैं महंगाई?
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि महंगाई सिर्फ खाने-पीने या पेट्रोल-डीजल से तय होती है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।
सोना-चांदी भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का हिस्सा होते हैं। जब—
- लोग निवेश के लिए ज्यादा सोना खरीदते हैं
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें चढ़ती हैं
- भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है
तो इसका सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ता है।
इस समय वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है, जिससे RBI को आगे चलकर महंगाई बढ़ने का खतरा दिख रहा है।
🍚 राहत की बात: खाने-पीने की सप्लाई मजबूत
हालांकि RBI ने यह भी साफ किया कि खाद्य महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है।
इसके पीछे कई सकारात्मक कारण हैं—
- खरीफ फसल का अच्छा उत्पादन
- सरकारी गोदामों में पर्याप्त अनाज भंडार
- रबी की बुवाई बेहतर
- जलाशयों में पानी का अच्छा स्तर
इन सब वजहों से आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों की सप्लाई मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
⚠️ फिर डर किस बात का?
RBI ने कुछ संभावित जोखिम भी गिनाए हैं:
- वैश्विक तनाव (Geopolitical Tension)
- ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव
- मौसम की मार
- सोना-चांदी की कीमतों में अस्थिरता
अगर इनमें से कोई भी फैक्टर बिगड़ता है, तो महंगाई फिर रफ्तार पकड़ सकती है।
आगे क्या?
RBI ने बताया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2024) 12 फरवरी को जारी होगी। इसके बाद अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति में पूरे वित्त वर्ष 2026–27 के लिए नया महंगाई अनुमान पेश किया जाएगा।
