चेन्नई:
तमिलनाडु की राजनीति में आज हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसदों की आपात बैठक बुलाई। यह बैठक प्रस्तावित निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को लेकर संभावित प्रभावों पर चर्चा के लिए आयोजित की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले असर और लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण में निष्पक्षता जैसे अहम मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।
लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव चर्चा में
केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जा सकती हैं। वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं।
यह प्रस्ताव नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसके तहत परिसीमन प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर चिंता
सीएम स्टालिन ने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का विरोध किया है। उनका आरोप है कि यह संशोधन लोकसभा सीटों में आनुपातिक वृद्धि सुनिश्चित नहीं करता, जिससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है।
केंद्र सरकार को चेतावनी
स्टालिन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यों से पर्याप्त परामर्श के बिना संवैधानिक संशोधन लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तमिलनाडु के हितों के साथ कोई समझौता हुआ, तो राज्य में बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
विशेष सत्र पर भी उठे सवाल
सीएम स्टालिन ने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया जा रहा है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल है। उन्होंने इसे “जबरन बुलाया गया सत्र” करार दिया और कहा कि इसका उद्देश्य परिसीमन से जुड़े संशोधन को जल्दबाजी में पारित कराना हो सकता है।
जनसंख्या नियंत्रण पर भी उठाया मुद्दा
स्टालिन ने यह भी कहा कि दक्षिणी राज्यों ने केंद्र की नीतियों के अनुसार जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाए थे, लेकिन अब उसी का नुकसान उन्हें प्रतिनिधित्व में कमी के रूप में उठाना पड़ सकता है।
अन्य राज्यों का समर्थन
इस मुद्दे पर रेवंत रेड्डी ने भी समर्थन जताया है और लोकसभा सीटों में आनुपातिक वृद्धि की मांग की है।
परिसीमन को लेकर दक्षिण बनाम केंद्र की बहस तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है, खासकर संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले।
(आवाज़ प्लस के लिए विशेष रिपोर्ट)
